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बिहार में मानव तस्करी का बड़ा खुलासा: 163 बच्चे मुक्त

बिहार में मानव तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें 163 नाबालिगों को कटनी रेलवे स्टेशन पर मुक्त कराया गया। रेलवे सुरक्षा बल और सरकारी रेलवे पुलिस की संयुक्त टीम ने इस अभियान को अंजाम दिया। बच्चों को बिना वैध दस्तावेजों के महाराष्ट्र ले जाया जा रहा था। इस मामले में आठ तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। जानें इस बचाव अभियान की पूरी कहानी और तस्करों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
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बिहार में मानव तस्करी का बड़ा खुलासा: 163 बच्चे मुक्त

बचाव अभियान की सफलता


पटना: बिहार में मानव तस्करी का नेटवर्क कितना व्यापक हो चुका है, इसका एक उदाहरण कटनी रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला। एक बड़े बचाव अभियान के तहत 163 नाबालिगों को, जिन्हें अररिया और अन्य जिलों से मजदूरी के लिए महाराष्ट्र ले जाया जा रहा था, सफलतापूर्वक मुक्त किया गया।


संयुक्त टीम का छापा

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) की एक संयुक्त टीम ने पटना-पूर्णा एक्सप्रेस पर छापा मारा और बच्चों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया। इस मामले में आठ तस्करों को हिरासत में लिया गया है, जो सभी बिहार के निवासी हैं।


जांच के निष्कर्ष

शुरुआती जांच से क्या पता चला?


प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ये बच्चे बिहार के अररिया जिले से इकट्ठा किए गए थे और उन्हें महाराष्ट्र के लातूर ले जाया जा रहा था। RPF को एक गुप्त सूचना मिली थी कि बच्चों के एक बड़े समूह को बिना किसी वैध दस्तावेज या टिकट के ले जाया जा रहा है। बचाए गए बच्चों की उम्र 6 से 13 वर्ष के बीच है।


बचाव प्रक्रिया

बच्चों को कैसे बचाया गया?


कटनी RPF के इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में यह अभियान शनिवार रात को शुरू हुआ और रविवार सुबह तक जारी रहा। इन बच्चों को सुरक्षित रूप से ट्रेन से उतार लिया गया। तस्करों के पास बच्चों के संबंध में कोई पहचान दस्तावेज नहीं थे।


बच्चों को कोचों में मवेशियों की तरह ठूंसकर ले जाया जा रहा था। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बच्चों को महाराष्ट्र ले जाने का मुख्य उद्देश्य उनसे बंधुआ मजदूरी करवाना था।


तस्करों की गिरफ्तारी

कितने तस्कर हुए गिरफ्तार?


GRP ने बिहार के विभिन्न जिलों के रहने वाले आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, जो 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की तस्करी से संबंधित है। इसमें दोषी पाए जाने वालों के लिए कम से कम 10 वर्ष के कठोर कारावास का प्रावधान है। पुलिस अब बिहार के भीतर इस सिंडिकेट के संपर्कों की जांच कर रही है।