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बिहार में सरकारी विभाग की जमीन नीलामी की कगार पर, गंभीर सवाल उठे

बिहार के कैमूर जिले में जल संसाधन विभाग की लापरवाही ने उसे जमीन नीलामी की कगार पर ला खड़ा किया है। सिविल कोर्ट के आदेश पर बकाया राशि का भुगतान न करने पर विभाग की 3.75 एकड़ भूमि नीलाम की जा सकती है। यह मामला मेसर्स शिव शंकर कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़ा है, जिसने 1992 से बकाया 28 लाख रुपये की मांग की थी, जो अब बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो गई है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल।
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मोहनिया में सरकारी तंत्र की लापरवाही

बिहार के कैमूर जिले के मोहनिया में एक घटना ने सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सिविल कोर्ट के आदेश पर जल संसाधन विभाग के कार्यालय में डुगडुगी बजाई गई और सार्वजनिक रूप से इश्तहार चिपकाए गए। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि विभाग ने बकाया राशि का भुगतान नहीं किया, तो उसकी ज़मीन की नीलामी की जाएगी।
अदालत द्वारा निर्धारित नीलामी प्रक्रिया के तहत विभागीय कार्यालय सहित कुल 3.75 एकड़ भूमि को नीलामी सूची में शामिल किया गया है। आदेश के बाद गुरुवार को ज़मीन की माप की प्रक्रिया पूरी की गई और रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई।
यह मामला मेसर्स शिव शंकर कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित है, जिसने आरोप लगाया है कि जल संसाधन विभाग पर 1992 से 28 लाख रुपये बकाया हैं। विभाग की लापरवाही और अदालती आदेशों की अनदेखी के कारण यह राशि अब ब्याज सहित लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
कंपनी ने पहले भभुआ व्यवहार न्यायालय में अर्जी दी थी, जहां से विभाग को भुगतान का आदेश मिला। लेकिन जब उस आदेश की अनदेखी की गई, तो कंपनी ने मोहनिया सिविल कोर्ट का रुख किया, जहां से अब सख्त कार्रवाई का आदेश जारी किया गया है।
अधिवक्ता प्रमोद कुमार पांडे के अनुसार, जैसे ही डुगडुगी बजाई गई और इश्तहार चिपकाए गए, कार्यालय के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। सभी के मन में एक ही सवाल था—"क्या सरकारी विभाग की ज़मीन भी नीलाम हो सकती है?" यह मामला केवल कैमूर या जल संसाधन विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सरकारी तंत्र की लापरवाही और निष्क्रियता को उजागर करता है। महज 28 लाख रुपये का समय पर भुगतान न करने की लापरवाही ने विभाग को अब डेढ़ करोड़ के कर्ज और ज़मीन नीलामी के कगार पर ला खड़ा किया है।