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बेगूसराय में तीन तलाक का मामला: दहेज के लिए महिला की संघर्ष की कहानी

बेगूसराय की रुखसाना खातून की कहानी दहेज और तीन तलाक के मुद्दों को उजागर करती है। शादी के कुछ महीनों बाद दहेज की मांग और शोषण का सामना करने के बाद, रुखसाना ने न्याय की लड़ाई शुरू की। पति द्वारा व्हाट्सएप पर तीन तलाक देने के बाद, वह हलाला की शर्तों का सामना कर रही हैं। इस मामले में पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानें पूरी कहानी और रुखसाना की संघर्ष की यात्रा।
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बेगूसराय में तीन तलाक का मामला: दहेज के लिए महिला की संघर्ष की कहानी

बेगूसराय में दहेज और तलाक का मामला


बेगूसराय: विवाह एक विश्वास और साथ निभाने का वादा होता है, लेकिन जब यह रिश्ता एक साधारण मोबाइल संदेश में समाप्त हो जाए, तो जीवन में अंधेरा छा जाता है। बेगूसराय की रुखसाना खातून की कहानी कुछ ऐसी ही है। उनकी शादी 11 मार्च 2022 को हुई थी, लेकिन कुछ महीनों बाद ही दहेज की मांग शुरू हो गई। पति ने व्हाट्सएप पर तीन तलाक दे दिया और फिर ससुर या जेठ से हलाला करने की शर्त रखी। दहेज, शारीरिक हिंसा और आर्थिक शोषण के आरोपों के साथ, वह अब न्याय की तलाश में है। यह मामला तीन तलाक कानून की सख्ती के बावजूद ऐसी घटनाओं पर सवाल उठाता है।


दहेज की मांग और प्रारंभिक प्रताड़ना

रुखसाना का कहना है कि शादी के तीन महीने बाद ही ससुराल वालों ने 5 लाख रुपये दहेज की मांग की। जब उन्होंने मांग नहीं मानी, तो उन पर मारपीट की गई और घर से निकाल दिया गया। समाज के दबाव में पति ने उसे वापस लिया, लेकिन दिल्ली ले जाकर उसका शोषण जारी रखा। पति ने उसके परिवार से 5 लाख रुपये लिए, गहने गिरवी रखवाए और उसकी बेटी की 1.40 लाख की एफडी तुड़वाई। कुल मिलाकर, लगभग 16-17 लाख रुपये की ठगी की गई।


तीन तलाक का संदेश और हलाला की शर्त

20 फरवरी 2024 को पति ने व्हाट्सएप पर 'तलाक, तलाक, तलाक' लिखकर भेज दिया। जब रुखसाना ने साथ रहने की इच्छा जताई, तो ससुर या जेठ से हलाला करने की शर्त रखी। 17 मार्च 2024 को दूसरी शादी की सूचना दी गई और देवर ने जान से मारने की धमकी दी। पति ने फोन पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उसे देह व्यापार में धकेलने की बात कही। महिला का कहना है कि यह सब दहेज और पैसे के लालच में हुआ।


पैसे मांगने पर हमले और धमकियां

रुखसाना ने पैसे वापस मांगने पर अपने मायके पर हमले का आरोप लगाया। इस हमले में वह और उसका भाई घायल हुए। अस्पताल में डॉक्टरों ने पुलिस को सूचित करने की सलाह दी, लेकिन पति ने माफी मांगकर मामला शांत कराया। जून 2023 में बेटे के जन्म के बाद प्रताड़ना और बढ़ गई। महिला पिछले दो वर्षों से थानों के चक्कर काट रही है, लेकिन उसके मामले में लापरवाही बरती जा रही है।


पुलिस और आयोग की कार्रवाई पर सवाल

पीड़िता के वकील अभिषेक जायसवाल का कहना है कि गंभीर धाराएं नहीं लगाई गईं। महिला थाना और फुलवरिया थाना के बीच फाइल घुमाई जा रही है। केस दर्ज होने के बाद पति के दबाव में उस पर चोरी का मुकदमा भी ठोंक दिया गया। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ममता कुमारी ने मामले का संज्ञान लिया है और पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने समाज में जागरूकता की आवश्यकता बताई है। अब देखना है कि पीड़िता को कब न्याय मिलता है।