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भारत की कृषि में डिजिटल परिवर्तन: 2047 तक विकास की दिशा में कदम

भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कृषि क्षेत्र की मजबूती को एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। नीति आयोग के डिजिटल कृषि मिशन 2.0 के तहत, खेती को डेटा आधारित प्रणाली में परिवर्तित किया जाएगा। इस मिशन के माध्यम से किसानों को सटीक और भरोसेमंद डेटा उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक का उपयोग करके किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा जाएगा। जानें कैसे ये बदलाव भारत की कृषि को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे।
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भारत की कृषि में डिजिटल परिवर्तन: 2047 तक विकास की दिशा में कदम

कृषि का महत्व: भारत के विकास का आधार

भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कृषि क्षेत्र की मजबूती को एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। देश की लगभग 46 प्रतिशत जनसंख्या आज भी कृषि पर निर्भर है, इसलिए किसानों की आय और उत्पादकता में वृद्धि के बिना विकास की कल्पना अधूरी है। नीति आयोग के अनुसार, छोटे और सीमांत किसानों के लिए आधुनिक तकनीक ही वह उपाय है जो सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन संभव बना सकता है।


कृषि की भूमिका: विकसित भारत की कुंजी

भारत में लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से हैं, जिनके पास एक हेक्टेयर से कम भूमि है। ऐसे किसानों के लिए महंगी मशीनें और पारंपरिक तकनीकें व्यवहारिक नहीं होतीं। इसलिए, नीति आयोग अब अत्याधुनिक तकनीकों पर जोर दे रहा है।


कृषि में आत्मनिर्भरता के तीन लक्ष्य

कृषि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कम पानी और खाद में बेहतर पैदावार, फसल की बर्बादी में कमी, और किसानों की लागत में सीधी कटौती, ये तीन लक्ष्य भारत को कृषि में आत्मनिर्भर बना सकते हैं।


डिजिटल कृषि मिशन 2.0: बदलाव की नई दिशा

नीति आयोग के अनुसार, डिजिटल कृषि मिशन 2.0 खेती को पारंपरिक ढांचे से निकालकर डेटा आधारित प्रणाली में परिवर्तित करेगा। यह मिशन तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है।


आधुनिक डिजिटल ढांचा

खेत से संबंधित डेटा एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा।


इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा

नई तकनीकों को प्रयोगशालाओं से निकालकर खेतों तक पहुंचाया जाएगा।


सरकारी और निजी साझेदारी

स्टार्टअप्स, कंपनियां और सरकार मिलकर समाधान तैयार करेंगी।


कृषि कोष: सटीक और भरोसेमंद डेटा

इस मिशन के तहत कृषि कोष नामक एक डिजिटल भंडार तैयार किया जा रहा है, जिसमें मिट्टी, मौसम, फसल और बाजार से संबंधित डेटा एकत्रित किया जाएगा।


किसानों के लिए लाभ

इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा, जैसे मिट्टी के अनुसार फसल सलाह, सही समय पर सिंचाई और खाद की जानकारी, और फसल बीमा तथा कृषि ऋण की प्रक्रिया को सरल बनाना।


मोबाइल और एआई: किसानों के नए साथी

भारत में एक कृषि विशेषज्ञ पर लगभग 1100 किसानों की जिम्मेदारी है। इस अंतर को भरने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जा रहा है।


ड्रोन दीदी और ग्रामीण युवाओं की नई भूमिका

ड्रोन दीदी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को ड्रोन संचालन और स्मार्ट मशीनों की ट्रेनिंग दी जा रही है।


एग्रीटेक स्टार्टअप्स: विकास का नया रास्ता

भारत में 1900 से अधिक एग्रीटेक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जो ड्रोन, सेंसर और मोबाइल ऐप के जरिए खेती को सरल बना रहे हैं।


भविष्य की खेती के लिए नई शिक्षा और कौशल

1960 की हरित क्रांति सरकारी शोध पर आधारित थी, लेकिन आज सरकारी और निजी सहयोग की आवश्यकता है।


तकनीक के साथ सुरक्षा और भरोसे की व्यवस्था

नई तकनीकों के साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं। इन्हें नियंत्रित करने के लिए सरकार पॉलिसी फोरसाइट यूनिट बना रही है।


क्यों यह बदलाव भारत के लिए आवश्यक है

कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि 2047 तक भारत का विकसित बनना तभी संभव है, जब किसान तकनीकी रूप से सक्षम और आर्थिक रूप से मजबूत होगा। डिजिटल कृषि मिशन उसी दिशा में पहला ठोस कदम माना जा रहा है।