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भारत की निर्यात चुनौतियाँ: ट्रंप की धमकियों का सामना

डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों के बीच भारत के निर्यात में गिरावट की समस्या गंभीर होती जा रही है। अमेरिका से दोगुना तेल खरीदने के बावजूद, भारत की व्यापारिक स्थिति कमजोर नजर आ रही है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे अमेरिकी टैरिफ और अन्य आर्थिक बाधाएँ भारतीय निर्यात को प्रभावित कर रही हैं और भारत को इन चुनौतियों का सामना कैसे करना चाहिए।
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भारत की निर्यात चुनौतियाँ: ट्रंप की धमकियों का सामना

भारत की निर्यात स्थिति और ट्रंप की धमकियाँ

डोनाल्ड ट्रंप भारत को लगातार चेतावनी दे रहे हैं, जबकि भारत ने अमेरिका से दोगुना तेल खरीदा है। यह सवाल उठता है कि भारत अमेरिका के सामने इतना कमजोर क्यों दिखाई देता है?


ट्रंप ने संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें खुश रखना चाहिए, अन्यथा भारत पर और टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस चेतावनी से भारतीय व्यापार जगत में चिंता का माहौल बन गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका मौजूदा 50 प्रतिशत टैरिफ को बढ़ाता है, तो इसका भारतीय निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। विशेष रूप से पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों को इससे अधिक नुकसान होगा। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने बताया कि पहले से लागू टैरिफ के कारण मई से नवंबर के बीच अमेरिका के लिए भारतीय निर्यात में 20.7 प्रतिशत की कमी आई है। यदि टैरिफ और बढ़ता है, तो यह गिरावट और तेज हो जाएगी।


जीटीआरआई ने यह भी बताया कि भारत के पास चीन जैसे बड़े खरीदारों की तरह सौदेबाजी की शक्ति नहीं है। इसलिए ट्रंप भारत को लगातार धमकियाँ दे रहे हैं, भले ही भारत ने हाल के महीनों में अमेरिका से दोगुना तेल खरीदा हो। यह स्पष्ट है कि भारत की कमजोरियों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। हाल ही में एक आरटीआई के जवाब में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने स्वीकार किया कि भारतीय निर्यात में गिरावट का मुख्य कारण केवल अमेरिकी टैरिफ नहीं है। बल्कि, लागत सामग्रियों की महंगाई, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों की गुणवत्ता की जांच की कमी, और शिपिंग कंटेनर्स की कमी भी प्रमुख बाधाएँ हैं।


पिछले नवंबर में एक बैठक में भारतीय निर्यातकों ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को इन समस्याओं से अवगत कराया था। जब ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक व्यापार के नियमों को एकतरफा तरीके से बदल दिया है, तब केंद्र और भारतीय उद्योगपतियों को इन मुद्दों के समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। भले ही टैरिफ अचानक लागू हुआ हो, लेकिन इन समस्याओं पर पहले से ध्यान दिया जाना चाहिए था। इन बाधाओं के कारण अन्य बाजारों में पहुँच बनाना भी कठिन हो गया है। इस बीच, ट्रंप की धमकियों को चुपचाप सहन करना भारत की मजबूरी बन गई है।