भारत के 'बॉयकॉट तुर्की' अभियान का तुर्की पर गहरा असर, पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट

तुर्की को भारत का समर्थन न मिलने का खामियाजा
तुर्की का पाकिस्तान के प्रति खुला समर्थन अब उसके लिए महंगा साबित हो रहा है। भारत में चल रहे 'बॉयकॉट तुर्की' अभियान ने वहां की पर्यटन और आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। भारतीय पर्यटक अब तुर्की जाने से बच रहे हैं, और भारतीय ट्रैवल पोर्टल्स भी तुर्की को प्रमोट करने से पीछे हट गए हैं.
भारतीय पर्यटकों की संख्या में 37% की कमी
जून 2025 में तुर्की भारतीय पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य रहा है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने केवल 24,250 भारतीय पर्यटक तुर्की पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 38,307 थी। इस प्रकार, लगभग 37 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। मई 2025 में भी तुर्की आने वाले भारतीयों की संख्या में कमी आई थी.
तुर्की का असली चेहरा सामने आया
भारत द्वारा मई में शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। इस समय तुर्की ने पाकिस्तान की मदद की, जिसे भारतीय सेना ने भी स्वीकार किया। उप सेना प्रमुख जनरल राहुल सिंह ने बताया कि भारत तीन देशों से लड़ रहा था - पाकिस्तान, तुर्की और चीन.
तुर्की के हथियारों से भारत पर हमला
भारतीय सेना ने 9 मई को यह स्पष्ट किया कि भारत में मारे गए आतंकियों के पास जो ड्रोन और हथियार मिले, वे तुर्की निर्मित थे। इस खुलासे के बाद भारत में तुर्की के खिलाफ बड़ा विरोध शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर 'बॉयकॉट तुर्की' हैशटैग के साथ लोगों ने विरोध जताया और तुर्की से व्यापार और पर्यटन संबंध तोड़ने की मांग की.
ट्रैवल पोर्टल्स ने तुर्की को किया किनारे
भारत के प्रमुख ट्रैवल पोर्टल्स जैसे MakeMyTrip, EaseMyTrip और ClearTrip ने तुर्की का प्रचार करना बंद कर दिया है। इन कंपनियों ने तुर्की के टूर पैकेज्स को प्रमोट न करने का निर्णय लिया है, जिससे तुर्की के पर्यटन उद्योग को सीधा झटका लगा है. समुद्र किनारे वाले तुर्की जैसे देशों के लिए पर्यटन एक महत्वपूर्ण आर्थिक स्रोत होता है, लेकिन भारत से हो रहे बहिष्कार ने उनकी स्थिति को कमजोर कर दिया है.
बहिष्कार से तुर्की की अर्थव्यवस्था पर असर
भारतीय पर्यटकों की संख्या में आई भारी गिरावट से तुर्की की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। जहां तुर्की हर साल लाखों भारतीयों से अच्छी कमाई करता था, अब वही आय स्रोत तेजी से सूखता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत का यह विरोध जारी रहा, तो तुर्की को आने वाले महीनों में और भी अधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.