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भारत को मिली इजराइल की नेगेव मशीन गन, मेक इन इंडिया का बड़ा कदम

भारत ने इजराइल से नेगेव लाइट मशीन गन की पहली खेप प्राप्त की है, जो मेक इन इंडिया पहल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह सौदा भारतीय सेना की पुरानी मशीन गनों को बदलने की आवश्यकता को पूरा करता है। नेगेव मशीन गन की विशेषताएँ इसे अद्वितीय बनाती हैं, जैसे कि इसका हल्का वजन और शक्तिशाली गोला बारूद। इसके अलावा, इसमें नाइट साइट्स की सुविधा भी है, जो अंधेरे में निशाना साधने में मदद करती है। जानें इस डील के पीछे की कहानी और इसके महत्व के बारे में।
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भारत को मिली इजराइल की नेगेव मशीन गन, मेक इन इंडिया का बड़ा कदम

भारत और इजराइल के बीच हथियारों की डील

हाल ही में यह जानकारी सामने आई है कि इजराइल की एक प्रमुख हथियार निर्माता कंपनी ने भारत को नेगेव लाइट मशीन गन की पहली खेप प्रदान की है। यह सौदा मेक इन इंडिया पहल के तहत पिछले दो से ढाई वर्षों में हुआ है, जबकि इजराइल हमास और ईरान के साथ संघर्ष में व्यस्त है। इस बीच, भारत और इजराइल के बीच हथियारों की डील जारी रही, जिसका एक बड़ा कारण मेक इन इंडिया का समर्थन था। दरअसल, भारतीय सेना और आईएफ लंबे समय से अपनी पुरानी मशीन गनों को बदलने की आवश्यकता महसूस कर रहे थे, और इसी क्रम में भारत को 2000 नेगेव 7.62 * 51 एलएजी की पहली खेप प्राप्त हुई है। यह कुल 41,000 यूनिट्स का एक महत्वपूर्ण ऑर्डर है। खास बात यह है कि ये बंदूकें इजराइल में नहीं, बल्कि भारत में निर्मित की जा रही हैं। यह तकनीकी हस्तांतरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस वर्ष 4000 और गनें आएंगी, और भविष्य में यह संख्या 41,000 तक पहुंच जाएगी।


नेगेव मशीन गन की विशेषताएँ

भारत ने इजराइल के साथ नेगेव मशीन गन की डील क्यों की? इसकी विशेषताएँ इसे अद्वितीय बनाती हैं। यह एक ऐसी मशीन गन है जो दीवारों को गिराने की क्षमता रखती है, जबकि इसका वजन इतना कम है कि एक सैनिक इसे पहाड़ों पर दौड़ते समय आसानी से संभाल सकता है। नेगेव 7.62 एमएम की श्रेणी में दुनिया की सबसे हल्की मशीन गनों में से एक है। इसमें 7.62 * 51 एमएम का नेटो मानक गोला बारूद उपयोग होता है, जो इसे अत्यधिक शक्तिशाली बनाता है। यह न केवल मानव लक्ष्यों को, बल्कि मजबूत दीवारों, सैंडबग बंकरों और हल्के बख्तरबंद वाहनों को भी भेदने में सक्षम है। इसमें एक स्विच होता है, जिससे इसे सेमी ऑटोमेटिक या फुल्ली ऑटोमेटिक मोड में बदला जा सकता है।


नाइट साइट्स और तकनीकी विशेषताएँ

युद्ध हमेशा दिन के उजाले में नहीं होते। नेगेव में ट्रिटियम नाइट साइट्स लगे होते हैं, जो बिना किसी बैटरी या बाहरी रोशनी के अंधेरे में भी चमकते हैं। इससे सैनिकों को निशाना साधने में आसानी होती है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि भारत ने अपनी सेना के लिए नेगेव मशीन गन को क्यों चुना, खासकर जब यह मेक इन इंडिया पहल के तहत निर्मित हो रही है। इसके अलावा, पीएलआर सिस्टम की बात करें तो, अडानी ग्रुप की यह कंपनी भारत की पहली प्राइवेट कंपनी है जो छोटे हथियार और गोला बारूद का निर्माण कर रही है। यह इजराइल की कंपनी आईडब्ल्यूआई और अडानी ग्रुप का एक संयुक्त उद्यम है। पहले, भारत सरकार के पास अपनी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां थीं, लेकिन वहां अक्सर देरी और गुणवत्ता से संबंधित समस्याएँ होती थीं।