भारत ने ईरान से फिर से एलपीजी गैस खरीदने का निर्णय लिया
मिडिल ईस्ट में तनाव और भारत की नई पहल
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच, जहां एक ओर ईरान है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और इजराइल हैं। इस स्थिति में मिसाइलों का लगातार उपयोग हो रहा है, जिससे रास्ते बंद हो रहे हैं और इसका सबसे बड़ा प्रभाव तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ रहा है। इसी संदर्भ में, भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। लगभग पांच साल बाद, भारत ने फिर से ईरान से एलपीजी गैस खरीदने का निर्णय लिया है। 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत को यह खरीद बंद करनी पड़ी थी। लेकिन अब, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा दी गई 30 दिन की अस्थाई छूट के बाद, भारत ने यह डील फिर से शुरू कर दी है। इसका मुख्य कारण यह है कि जब आटा महंगा होता है, तो रोटी भी महंगी हो जाती है।
ईरान से एलपीजी टैंकर की यात्रा
सूत्रों के अनुसार, ईरान से एलपीजी लेकर एक टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है। यह अरोड़ा एलपीजी टैंकर लगभग 43,000 टन एलपीजी, ब्यूटेन और प्रोपेन लेकर आ रहा है। यह जहाज 2019 के बाद ईरान से भारत आने वाला पहला एलपीजी कार्गो है, जो मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण भारत के गैस संकट को कम करने में मदद करेगा। बताया जा रहा है कि यह कार्गो पहले चीन जा रहा था, लेकिन अब इसका रुख भारत की ओर कर दिया गया है। मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण स्टेट ऑफ हॉर्मोस बंद है, और भारत अपनी आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से लाता है।
भारत के गैस संकट का समाधान
वर्तमान में, भारत गैस संकट के दबाव में है। घरेलू एलपीजी की मांग बढ़ रही है, और उद्योग को सप्लाई में कटौती करनी पड़ रही है। भारत 60% गैस बाहर से मंगवाता है। इस स्थिति में, भारत ने कई कदम उठाए हैं, जैसे कि हॉर्मूस में फंसे अपने टैंकरों को बाहर निकालना और खाली जहाजों को एलपीजी लोड करने के लिए भेजना। हालांकि, इस डील पर सरकार खुलकर कुछ नहीं बोल रही है, लेकिन ट्रेड डाटा और उद्योग के सूत्र इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यह प्रक्रिया अंदर ही अंदर चल रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस लेनदेन में भुगतान रुपये में हो सकता है, जिससे डॉलर की समस्या समाप्त हो जाएगी।
