भारत ने स्क्रैमजेट कंबस्टर के सफल परीक्षण से हाइपरसोनिक मिसाइल विकास में नई ऊंचाइयां छुईं
भारत ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के माध्यम से स्क्रैमजेट कंबस्टर का सफल दीर्घकालिक परीक्षण किया है, जो हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है, जिससे भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम को मजबूती मिली है। यह परीक्षण भारत की रक्षा तकनीक में एक नई दिशा प्रदान करता है।
| Jan 10, 2026, 11:18 IST
डीआरडीओ की नई उपलब्धि
रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ठंडा किए गए स्क्रैमजेट कंबस्टर का सफल दीर्घकालिक जमीनी परीक्षण करके हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। मंत्रालय ने स्क्रैमजेट-संचालित हाइपरसोनिक तकनीक पर नवीनतम जानकारी साझा करते हुए बताया कि हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की प्रयोगशाला, रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। डीआरडीएल ने एक बयान में कहा कि उसने 9 जनवरी को अपनी अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट (एससीपीटी) सुविधा में सक्रिय रूप से ठंडा किए गए स्क्रैमजेट फुल स्केल कंबस्टर का एक व्यापक दीर्घकालिक जमीनी परीक्षण सफलतापूर्वक किया, जिसमें 12 मिनट से अधिक का रन टाइम प्राप्त किया गया।
रक्षा मंत्री का बधाई संदेश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के उद्योग साझेदारों और शिक्षाविदों को स्क्रैमजेट इंजन के सफल जमीनी परीक्षण के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इस लंबे समय तक किए गए सफल परीक्षण ने भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम को एक मजबूत आधार प्रदान किया है। यह देश की रक्षा तकनीक के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उल्लेखनीय है कि हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। डीआरडीओ ने 9 जनवरी 2026 को अपनी अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप सेट टेस्ट सुविधा में सक्रिय रूप से ठंडा किए गए स्क्रैमजेट इंजन के पूर्ण आकार वाले दहन कक्ष का सफलतापूर्वक दीर्घकालिक जमीनी परीक्षण किया। यह परीक्षण हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डीआरडीओ की प्रगति
जनवरी 2025 में, डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट कंबस्टर का सफलतापूर्वक जमीनी परीक्षण किया, जिससे हाइपरसोनिक मिसाइलों में इसके परिचालन उपयोग की क्षमता का प्रदर्शन हुआ।
