भारत में झूठी खबरों का फैक्ट चेक: विदेश मंत्रालय ने जारी किया अलर्ट
सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी खबरें
नई दिल्ली: वर्तमान डिजिटल युग में फर्जी खबरें तेजी से फैल रही हैं। भारत से संबंधित कई झूठी जानकारियाँ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इस संदर्भ में, विदेश मंत्रालय ने भारत के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठे दावों का फैक्ट चेक किया है। मंत्रालय ने पहले भी कई फेक न्यूज का सत्यापन किया है। हालिया मामले में, फर्जी खबरों को भारत की विदेश नीति और रक्षा से संबंधित गलत जानकारी फैलाने के प्रयास के रूप में देखा गया है।
फेक न्यूज अलर्ट
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट चेक हैंडल ने एक फेक न्यूज अलर्ट जारी किया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात भारतीय नागरिकों को फुजैराह पोर्ट के माध्यम से निकालने के लिए कोई योजना नहीं बना रहे हैं।
गलत रिपोर्ट का खंडन
द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दोनों देश यूएई पोर्ट के जरिए लाखों भारतीय कामगारों को निकालने के लिए एक समझौते पर विचार कर रहे हैं। इस खबर को विदेश मंत्रालय ने खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे झूठे दावों से सावधान रहें।
डीपफेक वीडियो का सच
एक अन्य चेतावनी में, विदेश मंत्रालय ने एक 'डीपफेक वीडियो' को भी फ्लैग किया। इस वीडियो में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था, जिसमें झूठा दावा किया गया कि भारत ने राफेल फाइटर जेट खोने की बात स्वीकार की है। मंत्रालय ने इस वीडियो को फर्जी बताते हुए कहा कि प्रवक्ता ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।
सत्यापन की आवश्यकता
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट-चेक यूनिट ने भी पुष्टि की कि वीडियो को डिजिटल रूप से बदला गया था और यह एक संगठित गलत जानकारी अभियान का हिस्सा है। मंत्रालय ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।
पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा का खुलासा
अधिकारियों ने बताया कि इन झूठी खबरों और वीडियो के पीछे पाकिस्तान के कई प्रोपेगैंडा अकाउंट्स हैं, जिनका उद्देश्य भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाना है। नागरिकों से एक बार फिर सतर्क रहने और बिना सत्यापित सामग्री साझा करने से बचने की अपील की गई है।
