भारतीय नौसेना ने शुरू किया 'आईओएस सागर' कार्यक्रम, समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम
भारतीय नौसेना की नई पहल
भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से स्थापित करते हुए 'आईओएस सागर' कार्यक्रम के दूसरे संस्करण की शुरुआत की है।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से मित्र देशों के नौसैनिकों को भारतीय नौसेना के जहाजों पर एक साथ प्रशिक्षण और समुद्री अनुभव प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इसकी शुरुआत 16 मार्च से हुई है, जिसमें विभिन्न देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को जहाज पर गतिविधियों और पेशेवर प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य विभिन्न देशों के नौसैनिकों के बीच सहयोग, तालमेल और समुद्री अभियानों की समझ को बढ़ावा देना है। इस संस्करण में 16 मित्र देशों के नौसैनिक भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण सत्र और समुद्री गतिविधियाँ
कार्यक्रम की शुरुआत केरल के कोच्चि में नौसेना प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में पेशेवर प्रशिक्षण सत्रों से होगी।
यहां प्रतिभागियों को नौसैनिक संचालन, समुद्री कौशल और सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।
इसके बाद, प्रतिभागी भारतीय नौसेना के जहाज पर तैनात होकर समुद्र में संयुक्त संचालन गतिविधियों में भाग लेंगे, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।
समुद्री यात्रा और संवाद
इस यात्रा के दौरान, नौसेना का जहाज विभिन्न बंदरगाहों का दौरा करेगा और क्षेत्रीय नौसेनाओं तथा समुद्री एजेंसियों के साथ संवाद स्थापित करेगा।
इन गतिविधियों का उद्देश्य पेशेवर संबंधों को मजबूत करना, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना और साझा समुद्री चुनौतियों की गहन समझ विकसित करना है।
भारत की समुद्री सहयोग नीति
इस साल फरवरी में, भारतीय नौसेना ने इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम की अध्यक्षता की थी, जिसके तहत इस संस्करण में हिंद महासागर क्षेत्र के 16 सदस्य देशों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
यह पहल भारत की दीर्घकालिक समुद्री सहयोग नीति को आगे बढ़ाती है और क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के दृष्टिकोण को साकार करती है।
नौसेना का मानना है कि यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने में भारत की सक्रिय भूमिका को और मजबूत करेगी।
