मध्य प्रदेश के वैद्य ने जिंदा रहते हुए किया मृत्यु भोज का आयोजन
सतना जिले का अनोखा मामला
मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक दिलचस्प घटना सामने आई है। अतरवेदिया गांव के प्रसिद्ध वैद्य रामलोटन कुशवाहा ने अपने जीवनकाल में ही अपनी तेरहवीं का आयोजन करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने जीवन में ही भोज का आयोजन करने का मन बनाया और इसके लिए शोक संदेश के निमंत्रण पत्र भी बांट दिए।
शरीर दान का निर्णय
रामलोटन ने अपने शरीर को दान करने का निर्णय लिया था, जिसके चलते उनके जानने वालों ने उन पर तंज कसना शुरू कर दिया।
उनका कहना है कि अपने प्रियजनों को भोजन कराना एक पुण्य का कार्य है, और इसके लिए मृत्यु का इंतजार क्यों किया जाए। उन्होंने हाल ही में सतना के एक सरकारी कॉलेज में अपने शरीर दान करने के लिए सहमति दी थी।
लोगों की प्रतिक्रिया
उनके इस निर्णय से नाराज लोगों ने कहा कि वह अंतिम संस्कार के खर्च से बचना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने शरीर दान करने का निर्णय लिया।
इस पर रामलोटन ने अपने जीवन में ही मृत्यु भोज का आयोजन किया और निमंत्रण पत्र भेजकर लोगों को आमंत्रित किया। उनका कहना है कि यह आयोजन उन लोगों के लिए एक जवाब है जो अच्छे कार्यों में भी स्वार्थ ढूंढते हैं।
प्रधानमंत्री से मिली सराहना
रामलोटन की इस कहानी की चर्चा अब केवल गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग इस अनोखे निमंत्रण पत्र पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
उनका मानना है कि अंत में सभी को मिट्टी में मिल जाना होता है, लेकिन अगर मरने के बाद भी हम किसी के काम आ सकें, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। कुशवाहा वर्षों से औषधीय पौधों के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, और उनके काम की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की है।
