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मध्य प्रदेश में अधिकारियों की भूमि खरीद पर विवाद: 3200 करोड़ के प्रोजेक्ट से जुड़ी कहानी

मध्य प्रदेश में अधिकारियों द्वारा एक ही दिन में कृषि भूमि खरीदने के बाद 3200 करोड़ रुपए के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट की मंजूरी ने विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने एक ही दस्तावेज में भूमि खरीदी, जिसके बाद भूमि का उपयोग बदलने से कीमतों में भारी वृद्धि हुई। जानें इस मामले की पूरी कहानी और इसके पीछे के तथ्य।
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मध्य प्रदेश में अधिकारियों की भूमि खरीद पर विवाद: 3200 करोड़ के प्रोजेक्ट से जुड़ी कहानी

भूमि खरीद पर उठे सवाल


मध्य प्रदेश में अधिकारियों की संपत्ति से संबंधित एक नई रिपोर्ट ने देशभर में हलचल पैदा कर दी है। भोपाल के कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गांव में एक ही दिन में 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने कृषि भूमि का अधिग्रहण किया। यह ध्यान देने योग्य है कि भूमि खरीदने के कुछ महीनों बाद ही वहां 3200 करोड़ रुपए के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिल गई, और इसके बाद 10 महीने में भूमि का उपयोग भी बदल दिया गया। इस प्रक्रिया के बाद भूमि की कीमत में भारी वृद्धि हुई।


एक ही दस्तावेज में भूमि का अधिग्रहण

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 अप्रैल 2022 को 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री एक ही दस्तावेज में की गई थी। इस भूमि को 50 हिस्सों में बांटकर खरीदा गया, और दस्तावेजों में इसकी कीमत लगभग 5.5 करोड़ रुपए दर्शाई गई। हालांकि, बाजार मूल्य इससे अधिक था। संपत्ति विवरण में इसे समान विचारधारा वाले अधिकारियों द्वारा किया गया निवेश बताया गया है। लेकिन दस्तावेजों की जांच में यह सामने आया कि 50 हिस्सों के पीछे असली खरीदारों की संख्या 41 थी।


बायपास मंजूरी के बाद की स्थिति

भूमि खरीद के लगभग 16 महीने बाद, राज्य कैबिनेट ने 3200 करोड़ रुपए के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। प्रस्तावित बायपास का मार्ग खरीदी गई भूमि से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। इसके बाद, जून 2024 में भूमि का उपयोग कृषि से आवासीय में बदल दिया गया। यह वह समय था जब भूमि की कीमतों में भारी उछाल आया। पहले जिस भूमि की कीमत सामान्य कृषि भूमि के अनुसार थी, वह अचानक रियल एस्टेट निवेश का बड़ा केंद्र बन गई।


भूमि की कीमत में वृद्धि

जब यह भूमि खरीदी गई थी, तब इसकी कीमत लगभग 81 रुपए प्रति वर्गफीट थी। लैंड यूज बदलने के बाद, इसकी दर बढ़कर लगभग 557 रुपए प्रति वर्गफीट हो गई। वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार, यह कीमत अब 2500 से 3000 रुपए प्रति वर्गफीट तक पहुंच गई है। अनुमान है कि कुल भूमि का मूल्य अब 55 करोड़ से 65 करोड़ रुपए के बीच हो चुका है।