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मध्य प्रदेश में गर्भवती महिला की मौत: स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का मामला

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक गर्भवती महिला की मौत स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही के कारण हुई। महिला को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिली और चिकित्सा सुविधाओं की कमी के चलते उसकी जान चली गई। परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि एम्बुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा भी नहीं थी। इस घटना ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जांच का आश्वासन दिया है।
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मध्य प्रदेश में गर्भवती महिला की मौत: स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का मामला

छिंदवाड़ा में स्वास्थ्य सेवाओं की चूक


छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया ब्लॉक से स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही का एक दुखद मामला सामने आया है। यहां एक गर्भवती महिला की मौत हो गई, क्योंकि उसे समय पर एम्बुलेंस नहीं मिली और चिकित्सा सुविधाओं की कमी रही। टॉपरवानी गांव की निवासी शारदा उइके ने लगभग 5 घंटे तक सहायता का इंतजार किया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी जान चली गई।


प्रसव पीड़ा के समय की स्थिति

सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को शारदा उइके को अचानक प्रसव पीड़ा हुई। परिवार ने तुरंत जननी 108 एम्बुलेंस को कॉल किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि चावलपानी क्षेत्र में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। यह सुनकर परिवार के लोग चिंतित हो गए और अन्य विकल्पों की तलाश करने लगे।


लापरवाही की चौंकाने वाली बातें

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चावलपानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस खराब हालत में खड़ी थी। इसे समय पर ठीक नहीं किया गया, जिससे आपातकालीन स्थिति में इसका उपयोग नहीं हो सका। यह लापरवाही पूरे मामले को और गंभीर बना देती है।


पति द्वारा लगाए गए आरोप

इसके बाद पगारा से एम्बुलेंस भेजी गई, जो लगभग 100 किलोमीटर दूर से आई। गांव तक पहुंचने में उसे 4 से 5 घंटे लग गए। तब तक शारदा की घर पर ही डिलीवरी हो चुकी थी। महिला के पति ने आरोप लगाया कि पगारा से आई एम्बुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा भी नहीं थी, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।


महिला की मौत का कारण

बाद में चावलपानी स्वास्थ्य केंद्र से ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की गई और महिला को तामिया रेफर किया गया। जब उन्हें चावलपानी स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, तब भी उन्हें एम्बुलेंस से नीचे नहीं उतारा गया। जननी एक्सप्रेस में मौजूद नर्स ने लगभग 2 घंटे तक 108 एम्बुलेंस में प्राथमिक उपचार दिया और डॉक्टर से फोन पर सलाह लेकर इलाज करती रहीं।


महिला की स्थिति लगातार बिगड़ती रही। जब उन्हें तामिया रेफर किया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रास्ते में ही शारदा उइके ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस और सही इलाज मिल जाता, तो महिला की जान बच सकती थी।


जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरेश गुन्नाड़े ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। एम्बुलेंस का पंचर होना और ऑक्सीजन की कमी जैसे बिंदुओं पर जांच की जा रही है। यदि लापरवाही साबित होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।