महिला आरक्षण विधेयक पर भाजपा का आक्रोश रैली का ऐलान
राजनीति में उबाल: महिला आरक्षण विधेयक पर भाजपा की प्रतिक्रिया
भोपाल: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने 'आक्रोश रैली' आयोजित करने का निर्णय लिया है। मोहन यादव ने कहा कि विपक्ष का विधेयक का विरोध महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है और यह उनके सशक्तिकरण में बाधा डालता है।
भाजपा नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस
रविवार को आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा भी उपस्थित थीं। नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने महिला सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण प्रयासों को रोकने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा केवल वादे नहीं करती, बल्कि वास्तविकता में काम करके दिखाती है।
उन्होंने बताया कि राजधानी में सोमवार को आक्रोश रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भाग लेंगी। इसके अलावा, प्रदेश के विभिन्न संभागों और जिलों में भी ऐसी रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
विशेष विधानसभा सत्र की घोषणा
मोहन यादव ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश विधानसभा का एक विशेष एक दिवसीय सत्र बुलाया जाएगा। इस सत्र में महिला आरक्षण और 33 प्रतिशत आरक्षण पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में शहरी निकायों जैसे नगर पंचायत और नगरपालिकाओं में भी महिलाओं को आरक्षण लागू किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश में पहले से ही कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर महिलाएं कार्यरत हैं। वर्तमान में 17 जिलों में महिला कलेक्टर और 10 से अधिक जिलों में महिला पुलिस अधीक्षक तैनात हैं। एक जिले में तो कलेक्टर, एसपी और अन्य अधिकारी सभी महिलाएं हैं।
हेमंत खंडेलवाल का विपक्ष पर हमला
राज्य भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विरोध कर उन्होंने अपनी मानसिकता को उजागर किया है। वहीं रेखा वर्मा ने कहा कि पहले विपक्ष ने इस मुद्दे का समर्थन किया था, लेकिन अब उनका रुख बदल गया है।
इस घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। भविष्य में इस पर और तीखी बयानबाजी और राजनीतिक गतिविधियों की संभावना है।
