मार्च में तापमान 40 डिग्री तक पहुँचने की संभावना
गर्मी का समय से पहले आगमन, फसलों पर असर
समय से पहले आई गर्मी, फसलों पर मौसम का पड़ सकता है प्रतिकूल प्रभाव
इस वर्ष देश में गर्मी अपेक्षा से पहले ही दस्तक दे चुकी है, विशेषकर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में, जो कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तापमान में अचानक वृद्धि पर मौसम वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है, जबकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका गेहूं और सरसों की फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का अन्न भंडार में महत्वपूर्ण योगदान है। हाल के दिनों में इन क्षेत्रों में तापमान में तेजी से वृद्धि हुई है। तेज हवाओं के कारण किसानों को फसलों की सिंचाई में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिससे फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है.
गर्मी के रिकॉर्ड टूटने की संभावना
इस साल मार्च का महीना अब तक का सबसे गर्म साबित हो सकता है, जिससे गेहूं और सरसों की पैदावार में कमी आ सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मार्च में उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में तापमान औसत से काफी अधिक रह सकता है। भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है, को उम्मीद है कि 2026 में फसलों की बंपर पैदावार होगी, जिससे गेहूं का निर्यात बढ़ सकेगा और महंगे खाद्य तेलों के आयात में कमी आएगी। हालांकि, फसलों के विकास के महत्वपूर्ण चरणों में अधिक तापमान उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
आईएमडी इस सप्ताह के अंत तक मार्च के तापमान का अनुमान जारी कर सकता है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगले कुछ दिनों में तापमान में वृद्धि होगी और मार्च के अंत तक कई राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर सकता है। अनुमान है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इन राज्यों में गेहूं और सरसों का लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन होता है, और अधिक तापमान इन फसलों को प्रभावित कर सकता है।
