मुख्यमंत्री नायब सैनी ने समाधान शिविरों की समीक्षा की
मुख्यमंत्री की उच्च स्तरीय बैठक
चंडीगढ़, 09 अप्रैल। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वीरवार को चंडीगढ़ में सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में उन्होंने नागरिकों से सीधे संवाद करते हुए समाधान शिविरों के फीडबैक को लिया और यह स्पष्ट किया कि जनता की सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान, महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम के बादशाहपुर एसडीएम कार्यालय में अधिकारियों की अनुपस्थिति पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी उपायुक्तों (DC) और एसडीएम को निर्देश दिए कि वे स्वयं शिविरों में उपस्थित रहें और फाइलों के बजाय जनता के चेहरे देखकर कार्य करें।
समाधान शिविरों की सफलता
78 प्रतिशत शिकायतों का समाधान
हरियाणा सरकार के प्रमुख अभियान 'समाधान शिविर' ने पिछले दो वर्षों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। 10 जून 2024 को शुरू हुए इस मिशन के तहत लगभग डेढ़ लाख शिकायतें दर्ज की गई हैं। मुख्यमंत्री ने बैठक में आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इनमें से 78 प्रतिशत से अधिक मामलों का समाधान किया जा चुका है। उन्होंने 2024 से 2026 तक के लंबित मामलों की फाइलें मंगवाईं और अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर पेंडेंसी खत्म करने की समय-सीमा निर्धारित की।
समस्याओं का त्वरित समाधान
7 से 15 दिन में समाधान
समाधान शिविरों का आयोजन हर तहसील और उपमंडल स्तर पर सोमवार और गुरुवार को किया जाता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जिन समस्याओं का त्वरित समाधान संभव नहीं है, उन्हें लटकाने के बजाय 7 से 15 दिनों के भीतर निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता और महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक प्रियंका सोनी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
प्रगति रिपोर्ट की साप्ताहिक समीक्षा
हर शुक्रवार को प्रगति रिपोर्ट की जांच
मुख्यमंत्री ने व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि हर शुक्रवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में विशेष समीक्षा बैठक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो अधिकारी इन बैठकों से दूरी बनाएंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को अब केवल रिपोर्ट भेजने के बजाय शिकायतों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करनी होगी। सरकार का जोर इस बात पर है कि नागरिकों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए चंडीगढ़ के चक्कर न काटने पड़ें और स्थानीय स्तर पर ही न्याय मिले।
