मुरादाबाद के कॉसमॉस हॉस्पिटल में किडनी विशेषज्ञ की योग्यता पर सवाल उठे
कॉसमॉस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान गंभीर आरोप
मुरादाबाद: कॉसमॉस हॉस्पिटल में एक मरीज की बहन ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में तैनात डॉक्टर राकेश कुमार, जो खुद को किडनी विशेषज्ञ बताते हैं, वास्तव में किसी भी प्रकार की विशेषज्ञता के प्रमाण पत्र के बिना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। पीड़िता ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने न्याय की मांग की है।
शौर्य धर नामक एक व्यक्ति ने बताया कि उनकी 58 वर्षीय बहन रिचा द्विवेदी की तबीयत 20 मार्च को अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें कॉसमॉस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर राकेश कुमार के अलावा, अपूर्व मित्तल और निमेश गुप्ता ने भी उनका इलाज किया। शौर्य ने बताया कि उन्होंने अपनी बहन के इलाज के लिए नकद भुगतान किया और डॉक्टर के निर्देश पर आठ बार डायलिसिस कराया।
हालांकि, 31 मार्च को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी उनकी बहन की सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ, जबकि इस दौरान लगभग 2.5 लाख रुपये खर्च किए गए थे। शौर्य धर ने आरोप लगाया कि डॉक्टर राकेश कुमार के पास किडनी विशेषज्ञता का कोई प्रमाण नहीं है, और वे लोगों से धोखाधड़ी कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कॉसमॉस हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉक्टर अनुराग अग्रवाल भी इस धोखाधड़ी में शामिल हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि डायलिसिस के लिए 1500 से 3500 रुपये से अधिक नहीं लिए जा सकते, लेकिन अस्पताल ने 15000 रुपये वसूले हैं। पीड़ित ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
