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यूपी में अपराध दर में कमी: एनसीआरबी 2024 रिपोर्ट से खुलासा

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अपराध दर में कमी आई है। प्रदेश ने राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे यह 18वें स्थान पर पहुंच गया है। महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों में कमी आई है, लेकिन बच्चों के खिलाफ अपराधों की बढ़ती संख्या एक चिंता का विषय है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या खास है।
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यूपी में अपराध दर में कमी: एनसीआरबी 2024 रिपोर्ट से खुलासा

यूपी में अपराध मुक्त प्रदेश की दिशा में प्रगति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने योगी सरकार के तहत अपराध मुक्त प्रदेश बनने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह दावा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी 2024 के आंकड़ों से स्पष्ट होता है। प्रदेश में राष्ट्रीय औसत की तुलना में अपराध की दर कम रही है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में औसत 252.3 प्रतिशत अपराधों के मुकाबले यूपी में यह आंकड़ा 180.2 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से 28.5 प्रतिशत कम है। इसके अतिरिक्त, जनसंख्या के आधार पर यूपी अब अपराधों के मामले में 2023 के 24वें स्थान से बढ़कर 18वें स्थान पर आ गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 में आईपीएस और बीएनएस के तहत यूपी में कुल 4,30,552 अपराध दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 4,28,794 और 2022 में 4,01,787 थी। 2024 में दर्ज मामलों में से 76.7 प्रतिशत में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया, जो राष्ट्रीय औसत 75.6 प्रतिशत से अधिक है। यह दर्शाता है कि प्रदेश पुलिस ने तीन-चौथाई से अधिक मामलों में आरोप पत्र दाखिल करने में तत्परता दिखाई। खास बात यह है कि चुनावी वर्ष 2024 में प्रदेश में 2,610 बवाल के मामले दर्ज हुए, लेकिन कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। इसके अलावा, औद्योगिक, राजनीतिक और जातीय संघर्ष की घटनाएं भी नहीं हुईं।

महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी, लेकिन चुनौतियां बनी हुई हैं

महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 2023 की तुलना में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई है, और जघन्य अपराधों में कमी आई है। हालांकि, हत्या के मामलों में पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जबकि अपहरण के मामले कम हुए हैं। बच्चों के खिलाफ अपराधों की बढ़ती संख्या अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। 2024 में प्रदेश में संगठित अपराध का कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। आंकड़े सुधार के संकेत देते हैं, लेकिन अपराध के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।