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योगी सरकार ने सहायक प्रोफेसर परीक्षा को रद्द किया, नकल माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सहायक प्रोफेसर परीक्षा को रद्द कर दिया है, जिसमें नकल माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपनीय जांच के आदेश दिए थे। एसटीएफ ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी की। आयोग की अध्यक्ष ने भी त्यागपत्र दिया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की कार्रवाई के बारे में।
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योगी सरकार ने सहायक प्रोफेसर परीक्षा को रद्द किया, नकल माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई

सहायक प्रोफेसर परीक्षा में धांधली का मामला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में सभी भर्ती प्रक्रियाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में, नकल माफियाओं के खिलाफ जानकारी इकट्ठा करते हुए, उत्तर प्रदेश एसटीएफ को शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा सहायक आचार्य पद के लिए आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं की सूचना मिली।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपनीय जांच के आदेश दिए। 20 अप्रैल 2025 को, यूपी एसटीएफ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में फर्जी प्रश्नपत्र बनाने वाले तीन आरोपियों - महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल - को गिरफ्तार किया।

आयोग की अध्यक्ष ने दिया त्यागपत्र

इस मामले में, यूपी एसटीएफ ने लखनऊ के विभूतिखंड थाने में मामला दर्ज किया। जांच की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए आयोग की अध्यक्ष से त्यागपत्र लिया गया, क्योंकि महबूब अली उनके सहायक थे।

पूछताछ में महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकालकर कई अभ्यर्थियों को बेचे। उसकी स्वीकारोक्ति की पुष्टि एसटीएफ ने की है।

जांच के दौरान, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल नंबरों का डेटा विश्लेषण किया गया, जिससे अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के नाम सामने आए। आयोग को पत्र लिखकर संदिग्ध अभ्यर्थियों का डेटा मांगा गया।

इन तथ्यों के आधार पर, मुख्यमंत्री योगी ने परीक्षा को रद्द करने का आदेश दिया और आयोग को निर्देश दिया कि नई परीक्षा जल्द से जल्द निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाए।