Newzfatafatlogo

रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि: पेट्रोल और डीजल की बढ़ोतरी की संभावना

हाल ही में रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है, और यह संभावना जताई जा रही है कि घरेलू गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें भी जल्द बढ़ेंगी। इस बढ़ोतरी का प्रभाव छात्रों और प्रवासी श्रमिकों पर पड़ेगा। जानें कि सरकार की रणनीति क्या है और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कब हो सकती है।
 | 
रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि: पेट्रोल और डीजल की बढ़ोतरी की संभावना

रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि

हाल ही में कॉमर्शियल रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है, और यह निश्चित है कि घरेलू रसोई गैस और पाइपलाइन से सप्लाई होने वाली पीएनजी की कीमतों में भी जल्द ही बढ़ोतरी होगी। इस बढ़ोतरी का प्रभाव सभी वर्गों पर पड़ेगा, विशेषकर उन छात्रों और प्रवासी श्रमिकों पर जो बाहर रहकर पढ़ाई या काम कर रहे हैं। पहले से ही कई मजदूर और छात्र अपने घर लौटने लगे हैं, और यह प्रवृत्ति अब और तेज हो सकती है।


एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें कब बढ़ेंगी। अनुमान है कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में भी जल्द ही वृद्धि होगी। सोशल मीडिया पर पिछले तीन दिनों से यह चर्चा चल रही है कि विपक्षी दलों, विशेषकर राहुल गांधी, को गलत साबित करने के लिए 29 अप्रैल की आधी रात से पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता यह दावा कर रहे थे कि बंगाल में अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को समाप्त होगा और उसी दिन रात में तेल और गैस की कीमतें बढ़ेंगी।


सरकार की रणनीति और भविष्य की संभावनाएं

सरकार ने गैस की कीमतें बढ़ाने में 30 घंटे का इंतजार किया, जबकि बंगाल में मतदान 29 अप्रैल की शाम को समाप्त हुआ और गैस की कीमतें एक मई से बढ़ाई गईं। अब यह देखा जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कब बढ़ेंगी। इसके लिए आधार तैयार किया जा रहा है। मीडिया में एक विशेषज्ञ रिपोर्ट लीक हुई है, जिसमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण पेट्रोलियम कंपनियों को कितना नुकसान हुआ है और उनकी भरपाई के लिए कीमतें बढ़ाने की आवश्यकता है।


सूत्रों के अनुसार, पेट्रोलियम रिफाइनरी और मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल पर प्रति लीटर 25 रुपए और डीजल पर प्रति लीटर 100 रुपए तक का घाटा उठा रही हैं। ऐसे में यह सोचना आवश्यक है कि इस स्थिति में सरकार कितनी देर तक इंतजार कर सकती है। पश्चिम एशिया में हालात जल्द सुधरने की संभावना नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच सहमति नहीं बन रही है। यदि सहमति बन भी जाती है, तो भी तेल और गैस का उत्पादन सामान्य होने में कई महीने लगेंगे। एक रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति साल के अंत तक सामान्य हो सकती है।


इसलिए, सरकार के पास तेल की कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह संभव नहीं है कि सरकार मुफ्त अनाज वितरण योजना या अन्य योजनाएं बंद कर दे। उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती से सरकार की आय भी कम हुई है। यदि पेट्रोलियम कंपनियों की आय कम होती रही, तो सरकार का खर्च कैसे चलेगा? अंततः, सरकार पेट्रोलियम उत्पादों से होने वाली आय और रिजर्व बैंक से लाभांश के बड़े हिस्से के माध्यम से ही नकद पैसे और सेवाएं बांटने का अभियान चला रही है।