राजस्थान के दंपति ने ट्रेन की देरी पर जीती कानूनी लड़ाई, मिले मुआवजे
ट्रेन की देरी से मिली कानूनी जीत
नई दिल्ली: भारत में ट्रेनें अक्सर लेट होती हैं, और अधिकांश यात्री इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन राजस्थान के कोटा में रहने वाले एक दंपति ने इस समस्या का सामना करने का एक अनोखा तरीका निकाला। ट्रेन की देरी के कारण उनकी फ्लाइट छूट गई, जिसके बाद उन्होंने कानूनी कार्रवाई की और रेलवे से मुआवजा प्राप्त किया।
यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह दर्शाता है कि एक यात्री ने ट्रेन की देरी के कारण हुए नुकसान के लिए जिम्मेदारी मांगी और उपभोक्ता आयोग से अपने पक्ष में फैसला हासिल किया।
मामले का विवरण
कोटा के अनिल कुमार राणा और उनकी पत्नी अनीता ने दिसंबर 2017 में केरल की यात्रा की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली से तिरुवनंतपुरम जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट पहले से बुक की थी, जिसके लिए उन्होंने ₹33,929 खर्च किए थे।
वे कोटा से राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे, जो उन्हें हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर दोपहर 12:40 बजे पहुंचाना था, जबकि उनकी फ्लाइट शाम 6:05 बजे थी। लेकिन ट्रेन चार घंटे से अधिक लेट हो गई और शाम 4:50 बजे दिल्ली पहुंची।
दिक्कतों का सामना
फ्लाइट छूटने के बाद दंपति को दिल्ली में रात बितानी पड़ी। उन्हें होटल का खर्च उठाना पड़ा और अगले दिन के लिए नए फ्लाइट टिकट खरीदने पड़े, जिनकी कीमत ₹72,930 थी। यह राशि उनके पहले के टिकटों की तुलना में काफी अधिक थी। इसके अलावा, उन्हें मानसिक तनाव और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ा।
उन्होंने पहले रेलवे अधिकारियों से शिकायत की और फिर कानूनी नोटिस भेजा। जब उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो उन्होंने कोटा जिला उपभोक्ता आयोग से संपर्क किया।
निर्णय का परिणाम
अगस्त 2023 में उपभोक्ता आयोग ने दंपति के पक्ष में फैसला सुनाया और रेलवे को मुआवजा देने का आदेश दिया। आयोग ने अतिरिक्त हवाई यात्रा खर्च के लिए ₹39,001, मानसिक पीड़ा के लिए ₹20,000, होटल में ठहरने के लिए ₹5,000 और कानूनी खर्च के लिए ₹5,000 देने का निर्देश दिया। कुल मिलाकर, मुआवजा ₹69,001 तय किया गया। रेलवे ने इस फैसले को राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उनकी अपील खारिज कर दी गई।
