लखनऊ के होटल और रेस्टॉरेंट में अग्निशामक सुरक्षा की कमी, 80% मानकों का उल्लंघन
लखनऊ में होटल और रेस्टॉरेंट की स्थिति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगभग तीन हजार होटल और रेस्टॉरेंट संचालित हैं। इनमें से कुछ प्रमुख पांच और तीन सितारा होटलों को छोड़कर, लगभग 80 प्रतिशत होटल अग्निशामक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। सैकड़ों होटल बिना एनओसी के चल रहे हैं, जिनमें से करीब 500 होटल ऐसे हैं जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक हैं।
लखनऊ में सबसे अधिक जोखिम वाले होटल चारबाग क्षेत्र में स्थित हैं। यहां 150 से 200 स्क्वायर फीट में चार से पांच मंजिला होटल संचालित हैं, जिनकी सीढ़ियाँ केवल डेढ़ से दो फीट चौड़ी हैं। इन होटलों में प्रवेश और निकास का एक ही रास्ता है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में भागने का कोई साधन नहीं है। फायर एस्टिंगुशर केवल दिखावे के लिए हैं। यदि कोई हादसा होता है, तो दमकल भी मौके पर नहीं पहुंच सकेगी।
चारबाग में होटल विश्वनाथ, मोहन, बालाजी जैसे कई होटलों में अग्निकांड की घटनाएँ भी हो चुकी हैं। विश्वनाथ और मोहन होटल में बार भी संचालित है, फिर भी अग्नि सुरक्षा की व्यवस्थाएँ मानकों के अनुरूप नहीं हैं। चारबाग रेवड़ी मंडी और गुरुनानक मार्केट में अवैध होटलों की भरमार है, जहाँ कमरों का आकार केवल 4 गुणा 5 फीट है।
गुरुनानक मार्केट में होटल प्रीत कॉन्टिनेंटल में भी केवल एक ही प्रवेश और निकास का रास्ता है। हजरतगंज में मोती महल रेस्टोरेंट का भी यही हाल है, जहाँ शाम को चूल्हा जलता है। बेसमेंट और पहले तथा दूसरे तल पर खानपान की व्यवस्था है, लेकिन दोनों जगह जाने के लिए संकरा जीना है।
