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श्रावस्ती में NRHM घोटाला: पूर्व विधायक और अधिकारियों पर FIR दर्ज

श्रावस्ती में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) से जुड़े एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और अन्य अधिकारियों पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप है। विजिलेंस विभाग ने इस मामले में FIR दर्ज की है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में व्यापक धांधली की गई। जानें इस घोटाले की पूरी कहानी और इसके पीछे के मुख्य आरोपी कौन हैं।
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श्रावस्ती में NRHM घोटाला: पूर्व विधायक और अधिकारियों पर FIR दर्ज

श्रावस्ती में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा घोटाला

श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) से जुड़ा एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। सरकारी अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। विजिलेंस विभाग ने इस मामले में पयागपुर के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और दो पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारियों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह घोटाला 2017 से 2022 के बीच का बताया जा रहा है।


धांधली के तरीके

कागजों पर फर्जी गाड़ियां, बिना काम के हड़पी रकम

विजिलेंस की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की खरीद में व्यापक धांधली की गई थी। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों और डॉक्टरों की सहायता के लिए चलाई जाने वाली गाड़ियों के नाम पर भी पैसे का गबन किया गया। असल में केवल एक गाड़ी का संचालन किया गया, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलकर तीन गाड़ियों का पूरा पैसा सरकारी खजाने से निकाल लिया।


रिश्वत और फर्जी बिलिंग

बिना रजिस्टर बनाए नकली बिल पास, 25 फीसदी तक ली रिश्वत

जांच में यह भी सामने आया कि श्रावस्ती के स्वास्थ्य विभाग में 2017-18 से 2021-22 तक बिना किसी चिकित्सा प्रतिपूर्ति रजिस्टर के काम चल रहा था। जब मेडिकल वाउचरों की जांच की गई, तो पता चला कि 10 से 25 फीसदी तक का कमीशन लेकर नियमों के खिलाफ जाकर वाउचर पास किए गए। इस प्रकार सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।


रिटायर्ड अधिकारियों की संलिप्तता

रिटायर्ड अफसरों ने पहुंचाई ठेकेदारों को मलाई

टेंडर प्रक्रिया के बावजूद, तत्कालीन सीएमओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह और डॉ. विपेंद्र कुमार सिंह ने अपने निजी लाभ के लिए प्रभारी चिकित्साधिकारियों को खुली छूट दे दी। अस्पतालों के रखरखाव में भी बड़ा फर्जीवाड़ा पाया गया। आरपी कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी ने अस्पतालों में कोई काम नहीं किया, लेकिन अधिकारियों के साथ मिलकर कागजों पर काम दिखाकर पूरा पैसा हड़प लिया। दोनों रिटायर्ड सीएमओ इस जांच में दोषी पाए गए हैं।


जांच की स्थिति

यह जांच देवी पाटन मंडल के श्रावस्ती जिले में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की खुली सतर्कता जांच के तहत की गई थी। जांच पूरी हो चुकी है और अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी गई है। उत्तर प्रदेश सतर्कता प्रतिष्ठान, लखनऊ के सीआई सेक्टर के इंस्पेक्टर कमलेश्वर प्रसाद यादव ने लिखित शिकायत के आधार पर, लखनऊ सेक्टर पुलिस स्टेशन में छह आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।