सऊदी अरब में ऊंट महोत्सव का भव्य समापन, विजेता को मिला प्राइवेट द्वीप
किंग अब्दुल अजीज ऊंट महोत्सव का सफल आयोजन
रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में आयोजित 'किंग अब्दुल अजीज ऊंट महोत्सव' का 10वां संस्करण शानदार तरीके से संपन्न हुआ। इस महोत्सव के अंतिम दिन ऊंट रेस के परिणामों की घोषणा की गई, जिसने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया। प्रतियोगिता में सबसे अधिक अंक प्राप्त कर पहले स्थान पर आने वाले इब्राहिम अल-मुहैदिब को पुरस्कार स्वरूप एक 'प्राइवेट आइलैंड' दिया गया, जो किसी ऊंट दौड़ में दिया गया अब तक का सबसे अनोखा और महंगा पुरस्कार है।
टीम को भी मिले विशेष पुरस्कार
पूरी टीम को मिला फायदा, लाखों रियाल बंटे
इब्राहिम अल-मुहैदिब को मिले इस विशेष पुरस्कार का लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि उनकी पूरी टीम को भी मिला। आयोजकों ने प्रतियोगिता के स्तर को ऊंचा बनाए रखते हुए पुरस्कारों की भरपूर व्यवस्था की। पहले स्थान के अलावा, प्रतियोगिता में शीर्ष 10 में स्थान बनाने वाले प्रतिभागियों के बीच कुल 50 लाख सऊदी रियाल (करोड़ों रुपये) से अधिक की नकद राशि वितरित की गई। यह महोत्सव सऊदी अरब के संस्थापक किंग अब्दुल अजीज के नाम पर आयोजित किया जाता है।
34 दिनों तक चला उत्सव, डिजिटल गेम की धूम
34 दिन चला उत्सव, डिजिटल गेम ने मचाई धूम
यह प्रतियोगिता 1 दिसंबर से शुरू होकर 3 जनवरी तक, कुल 34 दिनों तक चली। इस बार महोत्सव में परंपरा और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिला। राई अल-नजर प्लेटफॉर्म द्वारा आयोजित 'सनम प्रतियोगिता' के दौरान एक नया 'सनम गेम' प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया। इस डिजिटल गेम का उद्देश्य ऊंटों की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी और तकनीक से जोड़ना था।
डिजिटल गेम की सफलता
40 दिन में 6 लाख खिलाड़ी जुड़े
सनम गेम ने डिजिटल दुनिया में भी सफलता के झंडे गाड़ दिए। लॉन्च होने के 40 दिनों के भीतर इस गेम ने 6 लाख से अधिक खिलाड़ियों को आकर्षित किया। यह गेम स्मार्टफोन ऐप स्टोर पर शीर्ष पर रहा और सऊदी अरब में सबसे अधिक खेला जाने वाला डिजिटल गेम बन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि लोग अब अपनी संस्कृति और पहचान को डिजिटल माध्यमों से भी अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
विजन 2030 का हिस्सा
विजन 2030 का हिस्सा है यह पहल
सऊदी अरब के ऊंट क्लब द्वारा की गई यह पहल देश के महत्वाकांक्षी 'विजन 2030' का हिस्सा है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना, ऊंटों से जुड़ी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक उद्योगों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। इस आयोजन ने न केवल सऊदी विरासत को लोगों के करीब लाया है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इसे पूरी दुनिया में मशहूर भी कर दिया है।
