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सीतापुर में बाघ का आतंक: दो किसानों की मौत, वन विभाग की टीम बेबस

सीतापुर के महोली क्षेत्र में बाघ का आतंक जारी है, जिसमें दो किसानों की जान चली गई है। वन विभाग की 40 विशेषज्ञों की टीम बाघ को पकड़ने में असफल रही है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और बाघ की निगरानी के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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सीतापुर में बाघ का आतंक: दो किसानों की मौत, वन विभाग की टीम बेबस

सीतापुर में बाघ का आतंक जारी


सीतापुर के महोली क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बाघ का आतंक बना हुआ है। इस दौरान दो किसानों की जान चली गई और दो मवेशियों को भी बाघ ने अपना शिकार बनाया। इसके बावजूद वन विभाग बाघ को पकड़ने में असफल रहा है।


बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने 10 ट्रैप कैमरे, एक थर्मल ड्रोन, तीन मचान और दो पिंजरे के साथ 40 विशेषज्ञों की टीम तैनात की है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। महोली के ग्राम नरनी में 22 अगस्त को शुभम दीक्षित और 29 अगस्त को ग्राम बसारा में राकेश की मौत के बाद से क्षेत्र में भय का माहौल है। घटना के 24 घंटे बाद भी वन विभाग को कोई पगचिह्न नहीं मिले हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है।


बाघ की निगरानी के लिए विशेष उपाय

डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि प्रभावित गांवों में बाघ की निगरानी के लिए पिंजरे और मचान बनाए गए हैं, लेकिन अभी तक बाघ का कोई सुराग नहीं मिला है। पीएचसी को कमांड सेंटर बनाकर वन विभाग ने डेरा डाला हुआ है, लेकिन खेतों में बाघ का कोई पता नहीं चल रहा है।


बाघ के आतंक के बीच राजनीतिक दलों के नेता भी प्रभावित गांवों में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिल रहे हैं और आर्थिक सहायता के साथ सांत्वना दे रहे हैं। हालांकि, बाघ को पकड़ने के लिए ठोस प्रयास न होने से उनकी नाराजगी भी स्पष्ट है।