सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राष्ट्रीय हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग पर रोक
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
दिल्ली, 22 अप्रैल। अब देश के सभी राष्ट्रीय हाईवे 'खतरे के कॉरिडोर' नहीं रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इन हाईवे पर भारी वाहनों और ट्रकों की अनियंत्रित पार्किंग पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वाणिज्यिक वाहन हाईवे के 'कैरिजवे' (मुख्य मार्ग) या उसके 'शोल्डर' (सड़क के किनारे वाली पट्टी) पर पार्क नहीं किया जा सकेगा। यह निर्णय विशेष रूप से उन हादसों को रोकने के लिए लिया गया है जो रात के अंधेरे में खड़े ट्रकों से पीछे से आने वाले वाहनों की टक्कर के कारण होते हैं।
सड़क हादसों की चिंताजनक स्थिति
2% सड़कों पर 30% मौतें
सुनवाई के दौरान अदालत ने चिंताजनक आंकड़े प्रस्तुत किए, जिसमें बताया गया कि भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग कुल सड़क नेटवर्क का केवल 2 प्रतिशत हैं, लेकिन देश के कुल सड़क हादसों में से 30 प्रतिशत इन्हीं हाईवे पर होते हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा उन दुर्घटनाओं का है जहाँ तेज रफ्तार गाड़ियाँ किनारे खड़े ट्रकों से टकरा जाती हैं। अब भारी वाहनों को केवल अधिकृत पार्किंग जोन, ले-बाय या सरकार द्वारा चिन्हित 'वे-साइड' सुविधाओं पर ही रुकने की अनुमति होगी।
नियमों का सख्ती से पालन
GPS और ई-चालान से कसेगा शिकंजा
सुप्रीम कोर्ट ने केवल कानून बनाने पर ही संतोष नहीं किया, बल्कि इसे सख्ती से लागू करने के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग का निर्देश दिया है। अब हाईवे पर Advanced Traffic Management System (ATMS) और GPS आधारित निगरानी तंत्र सक्रिय किया जाएगा। इससे कंट्रोल रूम को तुरंत पता चल जाएगा कि कौन सा वाहन अवैध रूप से हाईवे किनारे खड़ा है। नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर सीधे ई-चालान के जरिए जुर्माना लगाया जाएगा, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
अवैध ढाबों पर कार्रवाई
अवैध ढाबों पर चलेगी जेसीबी
सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे के किनारे अवैध ढाबों और कमर्शियल निर्माणों पर भी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि हाईवे किनारे नए अवैध निर्माणों पर रोक लगाई जाए और पुराने ढांचों को हटाया जाए, क्योंकि ये भी ट्रैफिक में बाधा बनते हैं। इसके क्रियान्वयन के लिए हर जिले में 'हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स' बनाने की बात कही गई है। इस फोर्स में राज्य सरकार, पुलिस और नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) के अधिकारी शामिल होंगे, जो सुनिश्चित करेंगे कि हाईवे केवल तेज और सुरक्षित सफर के लिए ही इस्तेमाल हों।
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