सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर सोना चोरी मामले में शंकर दास को झटका दिया
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली: सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले में देवास्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य केपी शंकर दास को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका मिला है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को उनकी याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने केरल हाईकोर्ट के आदेश में उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी।
कोर्ट की टिप्पणियाँ
जस्टिस दीपांकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि शंकर दास ने भगवान को भी नहीं छोड़ा। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि देवास्वोम बोर्ड के सदस्य के रूप में उनकी जिम्मेदारी है और वे चोरी के मामले में अपनी भूमिका से बच नहीं सकते। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केरल हाईकोर्ट ने शंकर दास की उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नरमी बरती थी।
केरल हाईकोर्ट का आदेश
केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले में केपी शंकर दास और के विजयकुमार आपराधिक साजिश से बच नहीं सकते। इसी टिप्पणी को हटाने के लिए शंकर दास ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया गया।
चोरी का मामला
सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर से कई किलो सोने की चोरी और कुछ कीमती सामानों के गायब होने की घटना ने काफी ध्यान आकर्षित किया। यह सोना 1998-99 में यूबी ग्रुप के चेयरमैन विजय माल्या द्वारा दान की गई द्वारपाल मूर्तियों पर लगी परत का हिस्सा था। इस मामले में केरल हाईकोर्ट के दखल के बाद एक उच्चस्तरीय जांच शुरू की गई।
जांच और गिरफ्तारियाँ
जांच के दौरान एन. वासु और ए. पद्मकुमार को गिरफ्तार किया गया, जो त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी के वरिष्ठ नेता हैं। इन गिरफ्तारियों ने विपक्ष के इस रुख को मजबूत किया कि मंदिर प्रशासन का उपयोग सत्ता केंद्रों के करीबियों द्वारा व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जा रहा था, जिससे व्यापक साजिश की सीबीआई जांच की मांग उठी। सबरीमाला सोने की चोरी मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अब तक वासु और पद्मकुमार सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है।
