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सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत: अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे कानूनी जीत बताया

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को कानूनी जीत बताया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह मामला दर्शाता है कि सत्ता का दुरुपयोग केवल विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। सिंघवी ने न्याय व्यवस्था की भूमिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी जोर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या निर्णय आया और इसके पीछे की कहानी।
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सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत: अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे कानूनी जीत बताया

सुप्रीम कोर्ट में कानूनी जीत


नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को कानूनी मर्यादा की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि सत्ता का दुरुपयोग केवल विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए किया जा रहा है।


सिंघवी ने कहा कि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आधार बनाकर मानहानि का दावा किया गया, उसमें सभी दस्तावेज पूरी पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत किए गए थे। उनके अनुसार, जब मामला केवल प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का हो और आरोपी जांच में सहयोग के लिए तैयार हो, तब गिरफ्तारी करना केवल राजनीतिक लाभ उठाने और अपमानित करने का एक तरीका है।




सिंघवी ने कहा कि हम यहां आत्मप्रशंसा करने नहीं आए हैं, बल्कि कुछ मूल सिद्धांतों की चर्चा करने आए हैं। जब मुद्दा आजादी का हो, तो न्याय व्यवस्था लोगों की संरक्षक होती है। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हम कानून के अधीन हैं। जब हम धर्म की रक्षा करते हैं, तो धर्म हमारी रक्षा करता है।


क्या गिरफ्तारी के बिना पूछताछ संभव नहीं?


इस मामले की शुरुआत कामरूप मजिस्ट्रेट से हुई और यह तेलंगाना हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। फिर यह गुवाहाटी हाईकोर्ट में गई और आज सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण फैसला आया है। जब मानहानि का आरोप होता है, तो यह सवाल उठता है कि क्या गिरफ्तारी के बिना पूछताछ नहीं हो सकती? लेकिन इस मामले में 60 पुलिसकर्मियों को एक व्यक्ति के घर भेजा गया, जिसका समाज और राजनीतिक दल में बड़ा नाम है। यह केवल डराने और उत्पीड़न करने का प्रयास था।


असम के मुख्यमंत्री को विचार करना चाहिए


सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री को तीन पन्नों में कोट किया है। ऐसे में असम के मुख्यमंत्री को यह सोचना चाहिए कि क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को यह शोभा देता है? उन्हें इस बारे में गंभीरता से विचार कर खेद व्यक्त करना चाहिए।


उन्होंने कहा कि 5 अप्रैल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दो दिन बाद असम सरकार ने एक NBW याचिका डाली, जिसे खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अंतरिम जमानत के मामले में जब तक दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।


इस मामले में कई पहलुओं को जोड़कर इसे मानहानि से अलग केस बनाने का प्रयास किया गया। इसमें 9 प्रावधानों का उपयोग किया गया था, जिन्हें हमने साबित किया है कि ये सभी जमानती हैं। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी है और अगर राजनीतिक बयान को इतना बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा, तो यह Article 19(1)(a) को खतरा होगा।


अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के लिए धन्यवाद दिया और कांग्रेस पार्टी समेत सभी को बधाई दी।


आज संविधान की जीत हुई है


कांग्रेस महासचिव (संचार) ने कहा कि आज संविधान की जीत हुई है। मोदी सरकार हर दिन संविधान पर हमला करती है, लेकिन आज संवैधानिक मूल्य और प्रावधान जीत गए हैं। हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हैं।