Newzfatafatlogo

स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर का 43वां दीक्षांत समारोह संपन्न

नई दिल्ली में स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर का 43वां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ, जिसमें केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस अवसर पर 373 विद्यार्थियों को स्नातक की डिग्री प्रदान की गई, और 20 विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। समारोह में कई विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
 | 
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर का 43वां दीक्षांत समारोह संपन्न

दीक्षांत समारोह का आयोजन

नई दिल्ली: स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) का 43वां दीक्षांत समारोह रविवार को भारत मंडपम में आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार के मंत्री श्री जयंत चौधरी ने स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वास्तुकारों और योजनाकारों की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।


आवश्यकता और प्रेरणा

श्री चौधरी ने आगे कहा, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कभी भी वास्तुकारों की जगह नहीं लेगी, बल्कि यह सीमित सोच को चुनौती देगी।" उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे रचनात्मकता, नैतिकता और तकनीकी प्रगति को मिलाकर 'विकसित भारत' के लक्ष्य में योगदान दें।


स्नातक विद्यार्थियों की संख्या

एसपीए नई दिल्ली के निदेशक प्रो. वीरेंद्र कुमार पॉल ने बताया कि इस वर्ष कुल 373 विद्यार्थियों ने स्नातक की डिग्री प्राप्त की, जिसमें 119 अंडरग्रेजुएट, 223 पोस्टग्रेजुएट और 31 पीएचडी शोधार्थी शामिल हैं। इसके अलावा, 20 विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।


विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस समारोह की अध्यक्षता प्रो. आर्क. हबीब खान ने की। इस अवसर पर श्री आनंद कुमार (आईएएस, सेवानिवृत्त), अध्यक्ष, रेरा और प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय, निदेशक, इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सेलरेटर सेंटर (आईयूएसी) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके साथ ही शिक्षा, सरकार और उद्योग के कई प्रमुख प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल हुए।


राष्ट्र निर्माण की दिशा में कदम

यह दीक्षांत समारोह स्नातक विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर रहा, जो वास्तुकला, योजना और डिजाइन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए आगे बढ़ेंगे।