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हरियाणा में मौसम का मिजाज: ओलावृष्टि और तेज हवाओं का अलर्ट

हरियाणा में मौसम विज्ञान केंद्र ने ओलावृष्टि और तेज हवाओं के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी गेहूं और सरसों की फसल कटने के करीब है। जानें किन जिलों में सबसे अधिक खतरा है और कृषि विभाग ने किसानों को क्या सलाह दी है। अगले हफ्ते मौसम में बदलाव जारी रहेगा, जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
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हरियाणा में मौसम का मिजाज: ओलावृष्टि और तेज हवाओं का अलर्ट

हरियाणा में मौसम की चेतावनी

चंडीगढ़. हरियाणा के आसमान में बादलों की छाया और रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी ने कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ ने आज और कल के लिए राज्य के कई हिस्सों में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है, जिसमें गरज-चमक के साथ भारी ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। पश्चिमी विक्षोभ और पाकिस्तान के ऊपर बने चक्रवातीय परिसंचरण के प्रभाव से हवाओं की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इस मौसम के बदलाव ने तापमान में 2 से 4 डिग्री की गिरावट ला दी है, जिससे उन किसानों की चिंता बढ़ गई है जिनकी गेहूं और सरसों की फसल कटने के करीब है।


सबसे प्रभावित जिले

इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा


मौसम विभाग के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, उत्तर हरियाणा के पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में मध्यम से भारी बारिश के साथ तेज धूल भरी आंधी चलने की संभावना है। वहीं, दक्षिण और मध्य हरियाणा के जिलों जैसे महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल में ओलावृष्टि का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, 30 और 31 मार्च को इस प्रणाली का प्रभाव अपने चरम पर होगा। इस दौरान खुले में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, खासकर बिजली कड़कने के समय पेड़ों या बिजली के खंभों से दूर रहने की।


कृषि के लिए सलाह

कटाई और भंडारण के लिए एडवाइजरी


यह बेमौसम बारिश उस समय हो रही है जब हरियाणा की मंडियों में सरसों की आवक शुरू हो चुकी है और गेहूं की बालियां पकने के कगार पर हैं। तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल खेतों में बिछ सकती है, जिससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि यदि फसल कट चुकी है, तो उसे तिरपाल या प्लास्टिक शीट से ढक कर रखें। मंडियों में भी खुले में रखी फसल को सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस समय बारिश से दानों में नमी बढ़ सकती है, जिससे सरकारी खरीद के समय किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।


आगे की स्थिति

अप्रैल की शुरुआत में भी नहीं मिलेगी राहत


फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि मौसम विभाग ने एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के संकेत दिए हैं। 2 अप्रैल से हिमालयी क्षेत्रों में फिर से बर्फबारी शुरू होगी, जिसका प्रभाव 3 से 5 अप्रैल के बीच हरियाणा और दिल्ली-NCR के मैदानी इलाकों में देखने को मिलेगा। इसका मतलब है कि अगले एक हफ्ते तक मौसम में बदलाव जारी रहेगा और बीच-बीच में तेज हवाओं का दौर भी जारी रह सकता है। तापमान में इस उतार-चढ़ाव से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।