हरियाणा में रबी फसलों की खरीद के लिए किसानों को मिली राहत
सरकार का नया आदेश
हिसार . हरियाणा की अनाज मंडियों में 28 मार्च से शुरू होने वाली रबी फसलों (सरसों और गेहूं) की सरकारी खरीद से पहले राज्य सरकार ने किसानों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। हिसार समेत पूरे प्रदेश के किसानों और आढ़तियों के विरोध के चलते सरकार को बायोमेट्रिक नियमों में बदलाव करना पड़ा है। अब किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने के लिए खुद ट्रैक्टर लेकर मंडी जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपने परिवार के किसी सदस्य, परिचित या आढ़ती को अधिकृत कर सकते हैं।
विरोध के बाद सरकार ने लिया निर्णय
नए आदेश के अनुसार, अब अधिकृत व्यक्ति किसान की फसल को मंडी लेकर आएगा और गेट पर बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर सत्यापन कराएगा। अंगूठा मिलते ही तुरंत गेट पास जारी किया जाएगा।
ट्रैक्टर-ट्रॉली के लिए नियम
हालांकि, सरकार ने बायोमेट्रिक उपस्थिति के नियमों में ढील दी है, लेकिन कुछ पुराने सुरक्षा नियम अभी भी लागू रहेंगे। मंडियों में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए गेट पर उस वाहन या ट्रैक्टर-ट्रॉली की फोटो खींची जाएगी, जिसमें फसल लदकर आ रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट नंबर प्लेट का होना अनिवार्य किया है। बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टरों को मंडी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह सख्ती दूसरे राज्यों से आने वाली अवैध फसल को रोकने के लिए की गई है।
सरकारी रिकॉर्ड से होगा मिलान
गेट पास जारी करने से पहले अधिकारियों द्वारा सरकारी रिकॉर्ड की सीधी जांच की जाएगी। जिस किसान के नाम पर जमीन की गिरदावरी दर्ज है और जिसने 'मेरी फसल- मेरा ब्योरा' पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया है, उसी के आधार पर मंडी में लाई गई फसल का मिलान होगा।
किसानों को होगा लाभ
सरकार के इस नए निर्णय का सीधा लाभ किसानों को होगा। अब उन्हें फसल कटाई के व्यस्त समय में घंटों मंडी की लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा। वे खेत का काम करते हुए अपने परिचित या आढ़ती के माध्यम से आसानी से अपनी फसल बेच सकेंगे।
