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हरियाणा में श्रमिकों के लिए नई ग्रेच्युटी नीति का ऐलान

हरियाणा सरकार ने श्रमिकों के लिए नई ग्रेच्युटी नीति की घोषणा की है, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। नए नियमों के तहत, कर्मचारियों को ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिलेगी और गणना के तरीके में भी बदलाव किया गया है। इसके अलावा, पुराने कानूनों को समाप्त कर एक नया राज्य कोड लागू किया जाएगा। जानें इस नई नीति के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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हरियाणा में श्रमिकों के लिए नई ग्रेच्युटी नीति का ऐलान

हरियाणा में श्रमिकों के लिए नई खुशखबरी

चंडीगढ़, 08 मई। हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। राज्य सरकार ने "कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (हरियाणा) रूल्स 2026" का प्रारूप जारी किया है। इस नए कानून के तहत अब उन कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी मिलेगी जो निश्चित अवधि यानी कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत हैं। पहले ग्रेच्युटी के लिए लंबी सेवा की आवश्यकता थी, लेकिन अब केवल एक वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर कर्मचारी इसके लिए पात्र होंगे।


ग्रेच्युटी का पैसा ऑनलाइन मिलेगा

ऑनलाइन मिलेगा ग्रेच्युटी का पैसा


हरियाणा श्रम विभाग ने इस नई व्यवस्था में भ्रष्टाचार और देरी को समाप्त करने के लिए डिजिटल प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव रखा है। कर्मचारी, उनके नॉमिनी या कानूनी वारिस अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यदि कोई ऑनलाइन माध्यम का उपयोग नहीं करना चाहता, तो वह स्पीड पोस्ट के माध्यम से भी अपना दावा प्रस्तुत कर सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रेच्युटी देय होने के 30 दिनों के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होगा।


गणना में बदलाव से मिलेगी राहत

छह महीने की अतिरिक्त सेवा अब पूरा एक साल


सरकार ने गणना के तरीके में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे फरीदाबाद और पानीपत की फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों को राहत मिलेगी। यदि कोई कर्मचारी अपनी निश्चित अवधि के बाद 6 महीने से अधिक समय तक कार्य करता है, तो उसे गणना में एक अतिरिक्त वर्ष माना जाएगा। इसका सीधा अर्थ है कि कर्मचारियों को मिलने वाली अंतिम राशि में वृद्धि होगी। फिक्स्ड टर्म कर्मचारी वे होते हैं जिनका अनुबंध किसी विशेष प्रोजेक्ट या तारीख के साथ समाप्त होता है।


वेतन की नई परिभाषा

वेतन की नई परिभाषा और भत्तों पर स्पष्टता


नए नियमों में वेतन की परिभाषा को लेकर भी भ्रम को दूर किया गया है। हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल खर्च, इंटरनेट-टेलीफोन रिइंबर्समेंट और स्टॉक ऑप्शन को वेतन का हिस्सा नहीं माना जाएगा। इसके अलावा क्रेच अलाउंस और मृत्यु वाउचर भी वेतन की गणना से बाहर रहेंगे। श्रम विभाग ने इस ड्राफ्ट पर आम जनता और विशेषज्ञों से 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।


पुराने कानूनों का अंत

खत्म होंगे सात दशक पुराने कानून


केंद्र सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 को लागू किए गए सोशल सिक्योरिटी कोड के बाद अब हरियाणा अपना राज्य कोड लागू करने जा रहा है। इसके प्रभावी होते ही 1951 से 2010 तक के कई पुराने नियम समाप्त हो जाएंगे। इनमें मैटरनिटी बेनिफिट रूल्स 1967 और पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी रूल्स 1972 जैसे महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य पुराने जटिल कानूनों को एक छत के नीचे लाकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।