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हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की चुनौतियाँ और गुटबाजी

हरियाणा में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव ने कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी को उजागर किया है। राहुल गांधी ने बिना किसी सलाह के करमबीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद से विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस को 37 विधायकों के बावजूद केवल 28 वोट मिले, जिसमें नौ वोट खराब हो गए। पार्टी ने क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया है। जानें इस चुनाव ने कांग्रेस की स्थिति को कैसे प्रभावित किया और हुड्डा ने किस प्रकार अपनी इज्जत बचाई।
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हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की चुनौतियाँ और गुटबाजी

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी इज्जत किसी तरह बचाई है। राहुल ने बिना किसी सलाह के करमबीर बौद्ध को उम्मीदवार घोषित किया, जिसके बाद से ही विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, लेकिन एक सीट जीतने के लिए 31 वोटों की आवश्यकता थी। इसके बावजूद, कांग्रेस को विधायकों को हिमाचल प्रदेश ले जाकर रखना पड़ा, और अंततः उम्मीदवार को केवल 28 वोट मिले। नौ वोट खराब हो गए, जिनमें से चार अवैध थे और पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। पहले ऐसा प्रतीत होता था कि हुड्डा के समर्थन से ही कोई विधायक टूटेगा, लेकिन उनके प्रयासों के बावजूद विधायक टूट गए।


क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस की कार्रवाई

कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। दिलचस्प यह है कि इनमें दो मुस्लिम विधायक शामिल हैं। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच और अवैध वोट डालने वाले चार विधायकों में से केवल एक विधायक हुड्डा का करीबी है। तीन विधायक सिरसा से हैं, जहां से कुमारी शैलजा सांसद हैं। इसके अलावा, दो महिला विधायकों को जाति के आधार पर शैलजा का करीबी माना जाता है। यह ध्यान देने योग्य है कि दो मुस्लिम विधायकों में से कोई भी हुड्डा की पहली पसंद का उम्मीदवार नहीं था। इस प्रकार, हरियाणा कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी ने राज्यसभा चुनाव पर गहरा प्रभाव डाला, और हुड्डा ने किसी तरह अपनी और राहुल गांधी की इज्जत बचाई है। राहुल को इस स्थिति की जानकारी दे दी गई है।