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हरीश राणा का निधन: निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद अंतिम विदाई

हरीश राणा, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति प्राप्त की थी, का हाल ही में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में किया गया, जहां परिवार और दोस्तों ने भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। हरीश की कहानी एक युवा सिविल इंजीनियर की है, जो एक दुर्घटना के बाद कोमा में चले गए थे। जानें उनकी जीवन यात्रा और अंतिम विदाई के बारे में।
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हरीश राणा का निधन: निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद अंतिम विदाई

हरीश राणा का अंतिम संस्कार


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति प्राप्त करने वाले हरीश राणा ने आखिरकार इस दुनिया को अलविदा कह दिया। गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले हरीश ने मंगलवार शाम को अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क में किया गया, जहां का माहौल अत्यंत भावुक था। परिवार, स्थानीय लोग और रिश्तेदारों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


हरीश की जीवन यात्रा

हरीश राणा ने पंजाब विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। 2013 में, वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरकर कोमा में चले गए थे और तब से वह जीवन समर्थन प्रणाली पर निर्भर थे। उन्होंने जुलाई 2010 में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। रक्षाबंधन के दिन, अगस्त 2013 में, वह अपनी बहन से मोबाइल पर बात कर रहे थे, तभी वह गिर गए। उस समय उनकी उम्र केवल 14 वर्ष थी और वह अपनी पढ़ाई के अंतिम वर्ष में थे। गिरने के बाद से वह कोमा में रहे और उनकी जिंदगी मशीनों पर निर्भर हो गई थी। कभी-कभी वह सांस लेते थे और आंखें झपकाते थे, लेकिन न बोल पाते थे और न ही हिल पाते थे।