2025 में भारतीय विदेश नीति: चुनौतियाँ और अवसर
2025 का वर्ष: भारतीय विदेश नीति की नई दिशा
वर्ष 2025 भारतीय विदेश नीति के लिए कई मायनों में एक अप्रत्याशित समय रहा। नरेंद्र मोदी की सरकार को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का सामना करना पड़ा, जिनकी समय-सीमा और दिशा स्पष्ट नहीं थी। भू-राजनीतिक संतुलन में बदलाव, पश्चिम एशिया से हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक बढ़ते तनाव और विभिन्न देशों में हो रही उथल-पुथल ने भारत की कूटनीति को सतर्क रहने के लिए मजबूर किया। जैसे-जैसे वर्ष समाप्त हो रहा है, यह जानना महत्वपूर्ण हो गया है कि कौन-सी वैश्विक घटनाएँ और निर्णय भारत के रणनीतिक हितों, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर सबसे अधिक प्रभाव डाल रहे हैं। साथ ही, 2026 में भारत के सामने कौन-सी नई चुनौतियाँ उभर रही हैं और कौन-से अवसर हैं जो भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर सकते हैं?
ट्रंप के प्रभाव में दुनिया
भारतीय नीति-निर्माताओं को उम्मीद थी कि ट्रंप भारत के प्रति सकारात्मक रुख अपनाएंगे, लेकिन यह अनुमान गलत साबित हुआ। व्यापार नीतियों में कठोरता, आव्रजन पर सख्ती और एच-1बी वीज़ा पर प्रतिबंधों ने भारत के विदेश मंत्रालय को आलोचना का सामना कराया। ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने भारत के सीमा-पार आतंकवाद पर नियंत्रण पाया, भारत की स्थापित दृष्टिकोण को कमजोर करता दिखाई दिया। इसके अलावा, पाकिस्तान को एफ-16 विमानों की आपूर्ति ने भारत की कूटनीतिक स्थिति को और भी चुनौती दी।
कनाडा और अफगानिस्तान के साथ संबंधों में सुधार
2025 में भारत की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता कनाडा के साथ संबंधों में सुधार रही। खालिस्तानी उग्रवाद के मुद्दे पर तनाव के बावजूद, दोनों देशों ने संवाद का रास्ता चुना। प्रधानमंत्री मोदी की जी-7 शिखर सम्मेलन में भागीदारी ने इस बदलाव का संकेत दिया। इसी तरह, भारत ने तालिबान के साथ सीधे संपर्क स्थापित कर एक साहसिक कदम उठाया, जिससे अफगानिस्तान में पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करने का अवसर मिला।
रूस और चीन पर ट्रंप का बदलता रुख
ट्रंप के रूस और चीन के प्रति बदलते रुख ने अमेरिका की रणनीतिक रूपरेखाओं को उलट दिया। पहले प्रमुख खतरे माने जाने वाले रूस और चीन अब चुनिंदा रूप से ही निपटे जा रहे हैं, जिससे भारत की संतुलन बनाने की रणनीति जटिल हो गई है।
भारत के व्यापार समझौते
भारत ने ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों को पूरा किया है, लेकिन अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य साझेदार देशों के साथ बड़े व्यापार समझौतों पर अभी भी काम चल रहा है।
क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की योजनाएँ
भारत म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले चुनावों पर ध्यान देगा। इसके अलावा, फरवरी 2026 में भारत एक वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जिसमें कई देशों के नेता शामिल होंगे।
वैश्विक मंचों पर मोदी की रणनीति
भारत में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन में ट्रंप की भागीदारी पर असमंजस बना हुआ है। वहीं, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अन्य नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
