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2026 में भारत-बांग्लादेश संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव

वर्ष 2026 भारत और बांग्लादेश के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाने वाला है। बांग्लादेश ने भारत से जल बंटवारे के समझौते के अंत के बाद मदद मांगी है। यह समझौता 1996 में हुआ था और अब समाप्त होने वाला है। जानें कि यह स्थिति बांग्लादेश के लिए क्या मायने रखती है और भारत की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है।
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2026 में भारत-बांग्लादेश संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में नया मोड़

वर्ष 2026 भारत और बांग्लादेश के संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाला है। यह कहना गलत नहीं होगा कि बांग्लादेश को जिस चीज का सबसे अधिक भय था, वह 1 जनवरी 2026 से शुरू हो चुका है। इस दिन से बांग्लादेश की समस्याओं का 365 दिन का काउंटडाउन आरंभ हो गया है। 2025 में बांग्लादेश ने भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की थी, और अब 2026 में भारत के पास उस स्थिति को बदलने का अवसर है। इस वर्ष एक महत्वपूर्ण समझौता समाप्त होने जा रहा है, जिसके कारण बांग्लादेश ने भारत से संपर्क किया है।


गंगा जल बंटवारे का समझौता

2026 की शुरुआत में बांग्लादेश ने भारत के सामने गिड़गिड़ाने के लिए अपने कुछ प्रतिनिधियों को भेजा है। 1996 में हुए गंगा जल बंटवारे के समझौते की अवधि अब समाप्त होने वाली है। इस समझौते के अनुसार, यह तय होना है कि भारत बांग्लादेश को गंगा नदी का कितना पानी देगा। यदि भारत पानी देने से मना करता है, तो बांग्लादेश को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।


समझौते का इतिहास

गंगा जल के बंटवारे पर पहला समझौता 7 नवंबर, 1977 को ढाका में हुआ था। इसके कुछ महीने बाद, 12 दिसंबर, 1996 को एक नया समझौता हुआ, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, यदि गंगा में 75000 क्यूसेक से अधिक पानी है, तो भारत 45000 क्यूसेक रखेगा और शेष बांग्लादेश को देगा।