AAP के सांसदों का BJP में विलय, NDA को मिली नई ताकत
नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने से शुक्रवार को NDA को एक महत्वपूर्ण बढ़त मिली है। हालांकि, सत्ताधारी गठबंधन अभी भी दो-तिहाई बहुमत से काफी दूर है। AAP सांसदों के पाला बदलने के बाद NDA की कुल ताकत अब 145 हो गई है।
राज्यसभा में बहुमत की आवश्यकता
राज्यसभा में कुल 244 सदस्य हैं, जिसमें दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सांसदों की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ है कि NDA को अभी भी 18 सांसदों की कमी है। यदि NDA ऊपरी सदन में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त कर लेता है, तो उसे संवैधानिक संशोधनों से संबंधित महत्वपूर्ण कानून पारित करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
लोकसभा में स्थिति
हालांकि लोकसभा में NDA के पास साधारण बहुमत है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे 363 सांसदों का समर्थन चाहिए। यही कारण है कि हाल ही में संसद में महिला आरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण बिल पारित नहीं हो सका।
BJP की सदस्यता में वृद्धि
आम आदमी पार्टी के सभी सात सांसदों, जिनमें राघव चड्ढा भी शामिल हैं, ने BJP में शामिल होते ही विलय के लिए एक आवेदन दिया। यदि राज्यसभा के सभापति C.P. राधाकृष्णन इस विलय को मंजूरी देते हैं, तो सत्ताधारी पार्टी के सांसदों की संख्या 113 हो जाएगी। वर्तमान में संसद में BJP के 106 सांसद हैं।
BJP को साधारण बहुमत के लिए क्या चाहिए?
राज्यसभा में साधारण बहुमत के लिए 123 सदस्यों की आवश्यकता होती है। सात नए सांसदों के शामिल होने के बाद BJP की ताकत 113 तक पहुंच जाएगी। यदि इसमें सात नॉमिनेटेड सदस्यों और दो निर्दलीय सांसदों का समर्थन भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 122 तक पहुंच जाएगी, जो बहुमत के निशान के करीब है। अब BJP साधारण बहुमत हासिल करने के लिए एक कदम दूर है।
राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर बताया कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने विलय का निर्णय लिया है। यदि चेयरमैन इस विलय को मंजूरी देते हैं, तो इन सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं होगा। AAP के 10 में से 7 सांसदों का एक साथ आना तकनीकी रूप से विलय की श्रेणी में आता है। NDA को उम्मीद है कि इस मजबूत स्थिति के सहारे भविष्य में महत्वपूर्ण बिल पास करना आसान हो जाएगा।
