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CNG की कीमतों में बढ़ोतरी: दिल्ली में पहली बार 80 रुपये के पार

दिल्ली में सीएनजी की कीमतें अब 80 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का नया दबाव बढ़ गया है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड द्वारा की गई इस वृद्धि के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इससे सार्वजनिक परिवहन, जैसे ऑटो और टैक्सी, के किराए में भी वृद्धि की संभावना है। टैक्सी यूनियनों ने सरकार से इस बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। जानें इस मुद्दे के सभी पहलुओं के बारे में।
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CNG की कीमतों में बढ़ोतरी: दिल्ली में पहली बार 80 रुपये के पार

महंगाई का नया झटका


नई दिल्ली: देश में महंगाई के बढ़ते स्तर के बीच, आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के बाद, अब सीएनजी (CNG) की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने शनिवार को सीएनजी के दाम में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के निवासियों पर सीधा असर पड़ेगा।


अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट के कारण, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसका प्रभाव अब भारत के घरेलू ईंधन बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब सीएनजी की कीमतों में वृद्धि की गई है।


दिल्ली में सीएनजी की नई कीमतें

दिल्ली में पहली बार 80 रुपये के पार CNG


नई कीमतों के अनुसार, दिल्ली में सीएनजी का दाम पहली बार 80 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर गया है। इससे पहले, 15 मई को सीएनजी की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो और 17 मई को 1 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई थी।


दिल्ली-एनसीआर में CNG के नए रेट



  • दिल्ली: 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम

  • नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद: 89.70 रुपये प्रति किलोग्राम

  • गुरुग्राम: 86.12 रुपये प्रति किलोग्राम


सार्वजनिक परिवहन पर असर

ऑटो और कैब किराया बढ़ने की आशंका


सीएनजी की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक प्रभाव सार्वजनिक परिवहन पर पड़ने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों में, बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी और बसें सीएनजी पर चलती हैं। ऐसे में, आने वाले दिनों में ऑटो और कैब किराए में वृद्धि हो सकती है।


कच्चे तेल की कीमतों का संकट

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता


अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट संकट से पहले, कच्चा तेल 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल के बीच था, लेकिन युद्ध के दौरान यह 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वर्तमान में, कीमतें 104 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच हैं।


भारत का क्रूड ऑयल बास्केट, जो फरवरी में लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल था, अब बढ़कर औसतन 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।


टैक्सी यूनियनों का विरोध

टैक्सी यूनियनों का बढ़ा विरोध


ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी यूनियन और कमर्शियल ड्राइवरों का विरोध प्रदर्शन भी तेज हो गया है। कई परिवहन संगठनों ने सरकार से बढ़े हुए दाम वापस लेने और टैक्सी किराए में संशोधन की मांग की है।