Dattatreya Hosabale: पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाजे हमेशा खुले रहने चाहिए
संवाद का महत्व
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने पाकिस्तान के साथ संबंधों पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का दरवाजा हमेशा खुला रहना चाहिए। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच जनता से जनता के रिश्ते तनाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं। होसबले ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंध बहुत पुराने हैं और हम एक ही राष्ट्र रहे हैं।
राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर भरोसा
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सिविल सोसायटी को आगे आना चाहिए, क्योंकि राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर भरोसा कम हो गया है। एक इंटरव्यू में होसबले ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान सरकार ने बातचीत की थी, लेकिन फिर भी पाकिस्तान ने पुलवामा जैसे हमले किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और आत्मसम्मान की सुरक्षा आवश्यक है, लेकिन बातचीत के लिए हमेशा एक रास्ता खुला रहना चाहिए।
सनातन की शाश्वतता
उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन को समाप्त करने की बात पर होसबले ने कहा कि सनातन शाश्वत है और यह केवल इसलिए नहीं गायब होगा क्योंकि कोई इसे खत्म करने की बात करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम हिंदू राष्ट्र नहीं बना रहे हैं, बल्कि यह पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। ब्रिटिश शासन के समय भी यह हिंदू राष्ट्र था। हिंदू राष्ट्र का अर्थ सांस्कृतिक पहचान से है, न कि धार्मिक राज्य से।
संघर्ष का कारण
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को होसबले ने तेल और संसाधनों के लिए पैदा हुए विवाद के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि दुनिया के अधिकांश युद्ध लालच, अहंकार और दूसरों पर कब्जा करने की मानसिकता से उत्पन्न होते हैं। इतिहास में हर युग में युद्ध होते रहे हैं और भविष्य में पानी को लेकर भी संघर्ष की आशंका जताई जा रही है।
भारत की भूमिका
होसबले ने कहा कि भारत को शांति और समझदारी का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। चाहे युद्ध जैसी स्थिति हो या न हो, भारतीय जीवनशैली में सादगी और संयम हमेशा होना चाहिए। संकट के समय यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
