JNU में फिर से सियासी बवाल: मोदी, शाह और अडानी के खिलाफ नारेबाजी का विवाद
नई दिल्ली में जेएनयू का सियासी घमासान
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। 5 जनवरी को कैंपस में हुए एक विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए, जिससे नया विवाद उत्पन्न हुआ है। इस नारेबाजी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
प्रदर्शन का कारण और नारे
जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) और वामपंथी संगठनों के नेतृत्व में यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से संबंधित माना जा रहा है। छात्रों ने मोदी, शाह और अडानी के खिलाफ नारे लगाए, जो कि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करने के बाद किया गया था।
दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया
दिल्ली पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत नहीं दर्ज की है, लेकिन विवाद बढ़ने पर पुलिस द्वारा स्वतः संज्ञान लेने की संभावना जताई जा रही है।
BJP की तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो के सामने आने के बाद BJP नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए इसे देशद्रोही गतिविधि करार दिया। उन्होंने इसे अर्बन नक्सलियों की गतिविधि बताया।
"MODI SHAH KI KABRA KHUDEGI JNU KI DHARTI PAR"
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) January 6, 2026
Urban Naxals in support of Anti National Umar Khalid and Sharjeel Imam protested late night in JNU outside Sabarmati Hostel.
This is not protest, this appropriation of Anti India Thought!
Intellectual Terorist can be academics,… pic.twitter.com/vwDoiI63pf
कपिल मिश्रा का बयान
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने भी इस मुद्दे पर तीखा बयान दिया। उन्होंने लिखा कि नक्सलियों और आतंकियों के समर्थन में नारे लगाने वाले हताश हैं।
सांपों के फ़न कुचले जा रहें हैं
— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) January 6, 2026
सपोलें बिलबिला रहें हैं
JNU में नक्सलियों, आतंकियों, दंगाइयों के समर्थन में भद्दे नारें लगाने वाले हताश हैं क्योंकि नक्सली खत्म किए जा रहें हैं, आतंकी निपटाए जा रहें हैं और दंगाइयों को कोर्ट पहचान चुका है
प्रदर्शन के पीछे की दो मुख्य वजहें
1. 5 जनवरी 2020 की हिंसा की बरसी: जेएनयू में 5 जनवरी 2020 को हुई हिंसा की बरसी पर यह प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दिन नकाबपोश हमलावरों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था। JNUTA ने इसे 'क्रूर हमले' की याद के रूप में मनाया।
2. उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ छात्रों ने नारेबाजी की, जिसमें खालिद और इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज की गई थीं। JNUSU ने इसे न्यायपालिका और छात्र आवाजों पर हमला बताया।
लाइब्रेरी सर्विलांस पर तनाव
कैंपस में लाइब्रेरी में फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम और मैग्नेटिक गेट लगाने को लेकर भी विरोध चल रहा है। इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस ने JNUSU के कुछ पदाधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे थे, जिसके खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया।
