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JNU में सियासी टकराव: छात्रों और प्रशासन के बीच बढ़ी तनातनी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हाल ही में छात्रों और प्रशासन के बीच एक गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ है। पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारों के चलते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, छात्र संगठन इसे लोकतांत्रिक विरोध के रूप में देख रहे हैं। इस विवाद ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुशासन के बीच बहस को फिर से जीवित कर दिया है। क्या यह टकराव और बढ़ेगा? जानें पूरी कहानी।
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JNU में सियासी टकराव: छात्रों और प्रशासन के बीच बढ़ी तनातनी

नई दिल्ली में विवाद की शुरुआत


नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर राजनीतिक और वैचारिक विवाद का केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक नारों के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच तनाव बढ़ गया है। प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि JNUSU इसे लोकतांत्रिक विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में देख रहा है।


प्रशासन की सख्त चेतावनी

मंगलवार को JNU प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कैंपस को नफरत फैलाने का स्थान नहीं बनने दिया जाएगा। X पर जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी बताया कि इस मामले में FIR दर्ज की जा चुकी है और दोषी छात्रों पर सस्पेंशन से लेकर निष्कासन तक की कार्रवाई की जा सकती है।


FIR की स्थिति पर भ्रम

हालांकि, प्रशासन के दावों के विपरीत, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की गई है। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, शिकायत प्राप्त हुई है लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है। इस बीच, प्रशासन और कानून व्यवस्था के बयानों में अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


प्रदर्शन का संदर्भ

सोमवार शाम को कैंपस में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ये नारे लगाए गए। आरोप है कि यह प्रदर्शन 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत न मिलने के विरोध में था। प्रशासन का कहना है कि नारे न केवल आपत्तिजनक थे बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अनादर भी दर्शाते हैं।


JNUSU का जवाब

छात्र संघ JNUSU ने प्रशासन के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। संघ का कहना है कि यह एक सुनियोजित प्रयास है, जिसका उद्देश्य संस्थान की छवि को खराब करना और छात्रों पर दबाव डालना है। JNUSU के अनुसार, यह कार्यक्रम जनवरी 2020 में कैंपस में हुई हिंसा की याद में आयोजित किया गया था। संघ ने मीडिया पर भी सत्ता के पक्ष में खड़े होने का आरोप लगाया है।


अभिव्यक्ति और अनुशासन का विवाद

यह विवाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच की रेखा को लेकर बहस को जन्म दे रहा है। प्रशासन का कहना है कि बोलने की आजादी मौलिक अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है। वहीं छात्र संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ने के संकेत दे रहा है।