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NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में नासिक से छात्र की गिरफ्तारी

NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक मामले में नासिक से BAMS छात्र शुभम खैरनार की गिरफ्तारी हुई है। CBI की चार टीमें जांच में जुटी हैं, और यह मामला अब डिजिटल माध्यमों पर केंद्रित हो गया है। पहले की थ्योरी पर नए सवाल उठ रहे हैं, जिससे जांच की जटिलता बढ़ गई है। क्या यह एक संगठित रैकेट है? जानें पूरी कहानी में।
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NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में नासिक से छात्र की गिरफ्तारी

NEET-UG 2026 पेपर लीक में नया मोड़

NEET-UG 2026 से संबंधित पेपर लीक मामले में एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। नासिक, महाराष्ट्र से एक छात्र को गिरफ्तार किया गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अब इस मामले की गहराई में जाने का प्रयास कर रहा है। नासिक में BAMS के छात्र शुभम खैरनार को क्राइम ब्रांच ने हिरासत में लिया है।


गिरफ्तारी का विवरण

शुभम खैरनार पर आरोप है कि उसने टेलीग्राम के माध्यम से एक संदिग्ध गेस पेपर खरीदा था, जो बाद में NEET-UG 2026 पेपर लीक की जांच में महत्वपूर्ण साबित हुआ। सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने इसे हरियाणा के एक अन्य व्यक्ति को भी भेजा था। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि यह नेटवर्क कितने राज्यों में फैला हुआ है और इसमें कितने लोग शामिल हैं।


CBI की जांच प्रक्रिया

CBI की चार टीमें नासिक में जांच में जुटी हुई हैं। आरोपी की कस्टडी लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि पेपर का स्रोत क्या था और इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक किसने पहुंचाया। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल ट्रेल और चैट रिकॉर्ड्स इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत हो सकते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कई संदिग्ध टेलीग्राम ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था, जहां परीक्षा से संबंधित दस्तावेज साझा किए जा रहे थे।


नई थ्योरी पर सवाल

इस गिरफ्तारी के बाद पहले की एक थ्योरी पर सवाल उठने लगे हैं, जिसमें कहा गया था कि प्रश्नपत्र नासिक की किसी प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि पेपर वहीं छपा था। अब जांच का ध्यान डिजिटल माध्यमों और निजी चैनलों पर केंद्रित हो गया है। अधिकारियों का मानना है कि गेस पेपर के नाम पर छात्रों को असली प्रश्नपत्र बेचने का एक संगठित रैकेट काम कर सकता है।