PM मोदी का इजरायली संसद में ऐतिहासिक संबोधन: आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का भावनात्मक संबोधन
नई दिल्ली: इजरायल की संसद 'नेसेट' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन ऐतिहासिक और भावनात्मक रहा। अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान, उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से इजरायल के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। मोदी ने हमास द्वारा किए गए हमलों को बर्बर करार देते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यरूशलेम की पवित्र भूमि से शांति की स्थापना का आह्वान किया। यह संबोधन दोनों देशों के साझा इतिहास और भविष्य की साझेदारी का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है।
आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री ने संसद में 7 अक्टूबर की भयानक आतंकी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने इसे मानवता पर एक बड़ा आघात बताया और मारे गए निर्दोष लोगों के परिवारों के प्रति 140 करोड़ भारतीयों की गहरी संवेदना प्रकट की। मोदी ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है। उनके अनुसार, आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इसके खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता अब सबसे बड़ी है।
#WATCH | Jerusalem, Israel: Addressing the Israeli Parliament, Prime Minister Narendra Modi says, "No cause can justify the murder of civilians. Nothing can justify terrorism. India has also endured the pain of terrorism for a long time. We remember the 26/11 Mumbai attacks and… https://t.co/V6i5dcBD8s pic.twitter.com/cApoO22Td7
— News Media (@ANI) February 25, 2026
भारत-इजरायल की अटूट एकजुटता
अपने भाषण में, प्रधानमंत्री ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि भारत और इजरायल का दुख साझा है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि भारतीय नागरिक इजरायल के हर दर्द को महसूस करते हैं और उनके दुख को साझा करते हैं। भारत न केवल आज बल्कि भविष्य में भी इजरायल का एक विश्वसनीय और अटूट सहयोगी बना रहेगा। यह एकजुटता केवल कूटनीतिक शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लोकतांत्रिक आदर्शों पर आधारित है जो दोनों देशों को जोड़ते हैं।
जन्म और मान्यता का विशेष संयोग
संबोधन के दौरान, पीएम मोदी ने एक दिलचस्प और व्यक्तिगत तथ्य साझा किया, जिससे सदन में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। उन्होंने बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था, जो वह ऐतिहासिक दिन था जब भारत ने इजरायल को औपचारिक रूप से मान्यता दी थी। उन्होंने इसे दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच गहरे सम्मान, दोस्ती और साझेदारी का प्रतीक बताया। यह तथ्य दोनों देशों के प्रगाढ़ होते रिश्तों की गंभीरता को दर्शाता है।
वैश्विक शांति और सुरक्षा की अपील
मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ की जाने वाली हिंसा को किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता। भारत की विदेश नीति में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है और इजरायल जैसे मित्र राष्ट्र की सुरक्षा भारत के लिए सर्वोपरि है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक शांति के लिए जरूरी है कि सभी ताकतें मिलकर आतंक के नेटवर्क को समाप्त करें।
भविष्य की मजबूत साझेदारी की नींव
अंत में, प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल के भविष्य के रिश्तों पर अपनी दृष्टि साझा की। उन्होंने इस मित्रता को आपसी सम्मान और गहरी साझेदारी पर आधारित बताया। मोदी के अनुसार, यह साझेदारी केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए एक साझा संकल्प है। इजरायली सांसदों ने मोदी के भाषण का गर्मजोशी से स्वागत किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि दोनों देश अब एक नई रणनीतिक ऊंचाई पर हैं। ये प्रगाढ़ संबंध वैश्विक राजनीति में स्थिरता लाएंगे।
