RSS का शताब्दी वर्ष: मोहन भागवत की अपील और समाज सेवा का संकल्प
नागपुर में संघ का विस्तार अभियान
नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में विस्तार का कार्यक्रम चला रहा है। इसी संदर्भ में नागपुर में आयोजित 'भारतदुर्गा शक्तिस्थल' और 'धर्म सभा' के बड़े समागम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने सभी परिवारों से आग्रह किया कि वे चार बच्चों का जन्म देने का संकल्प लें और उनमें से एक को संघ के स्वयंसेवक के रूप में समर्पित करें। यह बयान संगठन के भविष्य और राष्ट्र सेवा की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए दिया गया।
स्वयंसेवकों की सेवा की सराहना
मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवा की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जब भी देश में कोई संकट आता है, संघ के कार्यकर्ता सबसे पहले राहत और बचाव कार्यों में जुट जाते हैं। यह उनकी प्रतिबद्धता संगठन की मजबूती का प्रमाण है। शताब्दी वर्ष के अभियान में स्वयंसेवक समाज के हर वर्ग तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि राष्ट्र निर्माण में हर कोई योगदान दे सके।
भारत का भविष्य: विश्वगुरु बनने की दिशा में
संघ प्रमुख ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत के बिना कोई भविष्य संभव नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ लोग अभी भी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि भारत विश्वगुरु बनेगा या नहीं, लेकिन हमें इस संदेह को दूर करना चाहिए। भागवत जी ने जोर देकर कहा कि सही दिशा में प्रयास जारी रखने से लक्ष्य अवश्य प्राप्त होगा।
राम मंदिर का उदाहरण
राम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि एक समय इसके निर्माण पर भी संदेह था, लेकिन अंततः सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आया और मंदिर का निर्माण हुआ। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि जो होना तय है, वह निश्चित रूप से होगा। इस उदाहरण के माध्यम से उन्होंने भविष्य के प्रति आशावाद और दृढ़ विश्वास का संदेश दिया।
समाज तक पहुंच बढ़ाने का अभियान
हरियाणा के समाल्खा में हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संघ के संयुक्त महासचिव सी.आर. मुकुंद ने बताया कि शताब्दी वर्ष के डोर-टू-डोर अभियान के तहत स्वयंसेवकों ने केरल में अकेले 55,000 से अधिक मुस्लिम और 54,000 से ज्यादा ईसाई परिवारों तक पहुंच बनाई। इन परिवारों ने स्वयंसेवकों का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अभियान का उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक शक्ति का निर्माण करना है।
