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अजय राय का पीएम मोदी पर तीखा हमला, महिलाओं के आरक्षण पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने पीएम नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए महिलाओं के आरक्षण को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी ने अपनी पत्नी को सम्मान नहीं दिया, तो वे देश की महिलाओं को कैसे सम्मान देंगे? राय ने कांग्रेस के इतिहास में महिलाओं को दिए गए सम्मान का जिक्र किया और नोएडा में हाल की घटना पर सरकार की नाकामी की आलोचना की। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षकों के लिए टेट परीक्षा की अनिवार्यता पर भी आपत्ति जताई। इस बयान के पीछे की पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ें।
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अजय राय का पीएम मोदी पर तीखा हमला, महिलाओं के आरक्षण पर उठाए सवाल

अजय राय का बयान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने लखनऊ में आयोजित एक प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रधानमंत्री ने अपनी पत्नी को सम्मान नहीं दिया, वह देश की महिलाओं को कैसे सम्मान दे सकता है? राय ने यह भी कहा कि मोदी का महिलाओं के आरक्षण का वादा केवल एक दिखावा है।


कांग्रेस का महिलाओं के प्रति सम्मान

अजय राय ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिलाओं को सम्मान देने का कार्य किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरोजिनी नायडू को उत्तर प्रदेश का राज्यपाल और सुचित्रा कृपलानी को पहली महिला मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री और प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति बनाया गया।


महिला आरक्षण बिल पर राय

महिला आरक्षण बिल को लेकर राय ने कहा कि यह बिल सबसे पहले कांग्रेस द्वारा पेश किया गया था और इसे राज्यसभा में पास भी किया गया था। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि यदि वे ईमानदार होते, तो इस बिल को लोकसभा में भी पास करवा सकते थे।


नोएडा की घटना पर प्रतिक्रिया

नोएडा में हाल ही में हुई घटना पर राय ने कहा कि यह दर्शाता है कि सरकार पूरी तरह से असफल हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं और पुलिस ने उन पर बर्बर लाठीचार्ज किया। राय ने यह भी कहा कि कांग्रेस के समय स्थायी नौकरियों का प्रावधान था, जबकि वर्तमान सरकार में संविदा नौकरियों का चलन बढ़ गया है।


शिक्षकों के लिए टेट परीक्षा की अनिवार्यता पर आपत्ति

अजय राय ने 1 से 8वीं कक्षा के शिक्षकों के लिए टेट परीक्षा को अनिवार्य करने की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा जुलाई 2011 से लागू हुई है और इससे 1 लाख 75 हजार शिक्षकों की नौकरी खतरे में है। कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है और यदि उनकी नौकरी समाप्त होती है, तो कांग्रेस सरकार बनने पर उन्हें पुनः बहाल किया जाएगा।