अजित पवार के आरोपों से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल
नई दिल्ली में राजनीतिक भूचाल
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में एक नया मोड़ आया है, जब अजित पवार ने सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े दो दशक पुराने आरोपों को उजागर किया। बीजेपी के साथ मौजूदा तनाव के बीच, पवार ने कहा कि 1995 से 1999 के बीच शिवसेना-बीजेपी सरकार के दौरान जानबूझकर परियोजनाओं की लागत में वृद्धि की गई। उनका आरोप है कि यह सब पार्टी फंड और अधिकारियों के कमीशन के लिए किया गया। इस बयान ने सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष दोनों को असहज कर दिया है.
सिंचाई परियोजना का उदाहरण
पवार ने मराठवाड़ा की एक सिंचाई परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय इसकी लागत 330 करोड़ रुपये बताई गई थी। उन्होंने फाइल को खारिज कर पुनर्मूल्यांकन कराया, जिसमें पता चला कि परियोजना 220 करोड़ रुपये में पूरी की जा सकती थी। पवार का दावा है कि अतिरिक्त 110 करोड़ रुपये जानबूझकर जोड़े गए थे.
पार्टी फंड और कमीशन का खुलासा
मुख्यमंत्री के अनुसार, बढ़ाई गई राशि में से 100 करोड़ रुपये पार्टी फंड के लिए और 10 करोड़ रुपये संबंधित अधिकारियों के लिए रखे गए थे। पवार ने कहा कि यदि यह फर्जी लागत मंजूर हो जाती, तो राज्य को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास इस परियोजना से जुड़ी मूल फाइलें अभी भी मौजूद हैं.
बीजेपी-शिवसेना सरकार पर सीधा हमला
पवार के इस बयान को 1995-99 की शिवसेना-बीजेपी सरकार पर सीधा हमला माना जा रहा है। उस समय सिंचाई विभाग मुख्य रूप से बीजेपी के पास था और एकनाथ खडसे सिंचाई मंत्री थे। पवार का कहना है कि यदि 1999 में कानूनी कार्रवाई होती, तो राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ जाता.
बीजेपी की असहजता और राजनीतिक तनाव
इन आरोपों ने बीजेपी को असहज कर दिया है। पार्टी पहले से ही नवाब मलिक को लेकर अजित पवार गुट से नाराज है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में पवार के आक्रामक चुनावी प्रचार पर नाराजगी जताई थी। दोनों दल स्थानीय निकाय चुनावों में अलग-अलग मैदान में हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है.
एनसीपी की नजदीकी और भविष्य के संकेत
इस बीच, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में एनसीपी के दोनों गुट बीजेपी के खिलाफ एकजुट हुए हैं। अजित पवार ने इस तालमेल को सकारात्मक बताया और कहा कि वोट बंटने से रोकने के लिए यह आवश्यक था। हालांकि, उन्होंने बीजेपी से रिश्ते खराब होने से इनकार किया, लेकिन उनके बयान राजनीतिक जवाबी हमले के रूप में देखे जा रहे हैं.
