Newzfatafatlogo

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता सैन्य तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। अमेरिकी बलों ने ईरान द्वारा दागे गए ड्रोन को नष्ट करने के बाद तेहरान के एक सैन्य अड्डे पर रक्षात्मक कार्रवाई की। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए कहा कि वे समझौते के करीब हैं, लेकिन बातचीत अब भी अधर में है। इस बीच, अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। जानिए इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 | 
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता सैन्य तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव

होर्मुज जलडमरूमध्य में वैश्विक व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति गंभीर हो गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को अमेरिकी बलों ने ईरान द्वारा दागे गए कई घातक ड्रोन को नष्ट करने के बाद तेहरान के एक प्रमुख सैन्य अड्डे पर रक्षात्मक कार्रवाई की। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कड़े बयान के तुरंत बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अब कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर ‘आखिरी सांसें गिन रहा है।’


अमेरिकी बलों ने ईरान की ओर से दागे गए ड्रोन को नष्ट करने के बाद बुधवार को तेहरान के एक सैन्य अड्डे पर फिर से रक्षात्मक कार्रवाई की। अमेरिका के अधिकारियों ने बताया कि सेंट्रल कमान के बलों ने बिना उकसावे के दागे गए चार ड्रोन को नष्ट कर दिया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए खतरा बन रहे थे।


अमेरिकी बलों ने बंदर अब्बास में ईरान के उस अड्डे पर भी हमला किया, जहां से पांचवां ड्रोन दागने की तैयारी की जा रही थी। यह हमला ट्रंप के उस बयान के बाद हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान ‘आखिरी सांसें गिन रहा है।’


कैबिनेट बैठक की शुरुआत में ट्रंप ने कहा कि ‘हम समझौते के करीब हैं।’ पिछले सप्ताहांत भी उन्होंने कहा था कि उनका प्रशासन और ईरान ‘काफी हद तक’ किसी समाधान पर पहुंच चुके हैं। हालांकि, बातचीत अब भी अधर में है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बावजूद वह जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करेंगे।


ट्रंप ने कहा, ‘उन्हें लगा था कि वे मुझे थका देंगे। सोचा होगा-‘हम उसे रोक लेंगे, उसके सामने मध्यावधि चुनाव हैं। मुझे चुनाव की कोई परवाह नहीं।’ ट्रंप ने माना कि अभी काम बाकी है, लेकिन उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष वहां पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘वे बहुत चाहते हैं कि समझौता हो। अभी तक नहीं हुआ। हम इससे संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन होंगे- या तो वह, या फिर हमें काम पूरा करना होगा।’


बातचीत सोमवार को और जटिल हो गई, जब अमेरिकी बलों ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों और बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नौकाओं पर हमले किए। अमेरिका का कहना है कि लगभग तीन माह पहले शुरू हुए इस संघर्ष में वह ‘संयम’ के साथ कदम उठा रहा है, जबकि ईरान ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे ‘बुरी नीयत और अविश्वसनीयता’ का प्रमाण बताया।


इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने आर्थिक दबाव बनाने के लिए ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए।


इस बार निशाना ईरान की उस नवगठित संस्था को बनाया गया है जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है। यह कदम सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक दबाव का उपयोग करके ईरान के नेतृत्व को युद्ध समाप्त करने और इस जलमार्ग को खोलने के समझौते पर मजबूर करने की अमेरिकी कोशिश का हिस्सा है।


वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में कहा, ‘वैश्विक समुद्री व्यापार को बाधित करने की ईरानी सेना का यह ताजा प्रयास इस बात का सबूत है कि ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ अभियान ने इस शासन को नकदी के लिए बुरी तरह मजबूर कर दिया है।’ प्रतिबंध ईरान के ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ और उस एजेंसी के साथ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाते हैं। इस एजेंसी ने इसी महीने घोषणा की थी कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को मंजूरी देगी और उन पर शुल्क लगाएगी, जो प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक हो सकता है।


ईरान के अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने इस निगरानी व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से सुरक्षित आवाजाही का एकमात्र रास्ता वही गलियारा है, जिसे उसने निर्धारित किया है। उसने चेतावनी दी कि जो जहाज तय मार्ग से हटेंगे, उन्हें हमलों और कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ सकता है।