अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच चीन पर नजरें
अमेरिका की नई सैन्य तैनाती
वेनेजुएला पर हमले के बाद, ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है, और उनके अपने समर्थक भी इस मुद्दे पर उन पर सवाल उठा रहे हैं। हाल ही में, रूस के तेल टैंकर पर कब्जा करने के बाद, ट्रंप ने एक गंभीर गलती की है। इस घटना ने रूस को भड़काया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका पर परमाणु हमले की धमकियां दी जा रही हैं। रूस ने अपनी सबमरीन और युद्धपोतों को समुद्र में उतार दिया है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध का खतरा बढ़ गया है। यह पहली बार है जब रूस और अमेरिका आमने-सामने आ गए हैं।
दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी गतिविधियाँ
अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में कई लड़ाकू विमानों और परमाणु युद्धपोतों को तैनात किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है। ट्रंप के इस निर्णय के बाद, चीन भी सक्रिय हो गया है। अमेरिका ने अपने परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को तैनात किया है, जिससे F35 सी स्टेल्थ फाइटर जेट की उड़ानें भरी जा रही हैं। अमेरिकी नौसेना ने इस तैनाती की तस्वीरें भी साझा की हैं।
अमेरिका का उद्देश्य और संभावित परिणाम
यूएसएस अब्राहम लिंकन को दक्षिण चीन सागर में फ्लाइट ऑपरेशंस करते हुए देखा जा सकता है। अमेरिकी नौसेना का कहना है कि इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियों को रोकना और सहयोगी देशों के साथ सैन्य तालमेल को मजबूत करना है। हालांकि, यह निर्णय रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच लिया गया है, ताकि चीन भी रूस के साथ मिलकर कोई कार्रवाई न कर सके। ट्रंप को यह समझना होगा कि उनकी ये हरकतें उलटी पड़ सकती हैं, क्योंकि इससे यह संदेश जाएगा कि वे तनाव बढ़ा रहे हैं।
