अमेरिका का वेनेजुएला पर नियंत्रण: ट्रंप की प्रतिक्रिया
वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप
वेनेजुएला पर अमेरिका का नियंत्रण: अमेरिका ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा किया। इस घटना के बाद, वैश्विक समुदाय दो धड़ों में बंट गया है। एक ओर, कई यूरोपीय देशों ने इसे तानाशाही का अंत बताया, जबकि अन्य ने इसे एक लोकतांत्रिक राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला माना। इसके साथ ही, यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने यह ऑपरेशन वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा करने के लिए किया। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
वास्तव में, अमेरिका के हमले से पहले, मादुरो ने एक साक्षात्कार में कहा था कि अमेरिका वेनेजुएला में शासन परिवर्तन की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका उसके विशाल तेल भंडार तक पहुंच प्राप्त करना चाहता है। इस संदर्भ में, एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि क्या ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व का उद्देश्य तेल या सत्ता परिवर्तन था? ट्रंप ने उत्तर दिया कि यह पृथ्वी पर शांति के लिए किया गया। उन्होंने अमेरिका की पुरानी मोनरो डॉक्ट्रिन को नए रूप में डॉन-रो डॉक्ट्रिन के रूप में संदर्भित किया।
मोनरो डॉक्ट्रिन 1823 की अमेरिकी नीति है, जिसके तहत पश्चिमी क्षेत्रों को अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। ट्रंप ने कहा कि पिछले राष्ट्रपतियों ने इस डॉक्ट्रिन को भुला दिया, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला का प्रशासन मोनरो के समय से काफी आगे बढ़ चुका है और उनकी गतिविधियाँ अमेरिकी विदेश नीति का उल्लंघन हैं। ट्रंप ने वेनेजुएला को एक मृत देश बताया और कहा कि अमेरिका वहां तब तक नियंत्रण रखेगा जब तक सब कुछ सुरक्षित नहीं हो जाता।
